सिरसा, 29 जून (वार्ता) हरियाणा में सिरसा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई से लागू की जा रही नई ग्रामीण रोजगार योजना वीबीजी-आरएएमजी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि नई व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है, मजदूरों के अधिकार कमजोर होते हैं या रोजगार के अवसर घटते हैं, तो केंद्र सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार रही है। इस योजना ने रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पलायन रोकने और गरीब परिवारों की आजीविका सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि नई योजना को लेकर कई राज्यों ने वित्तीय हिस्सेदारी, मजदूरी दर, रोजगार के दिनों और अन्य प्रावधानों पर आपत्तियां जताई हैं। यदि राज्य सरकारें अतिरिक्त वित्तीय बोझ और व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान दिला रही हैं, तो केंद्र सरकार को उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी नई योजना का उद्देश्य गरीबों के अधिकारों को कमजोर करना नहीं, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाना होना चाहिए। मजदूरी दर महंगाई के अनुरूप बढ़ाई जानी चाहिए तथा कृषि सीजन के दौरान रोजगार उपलब्ध कराने के प्रावधान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लचीले बनाए जाने चाहिए।
सांसद सैलजा ने मांग की कि नई योजना को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय सभी राज्यों, पंचायत प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श कर आवश्यक संशोधन किए जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण गरीबों के रोजगार, आय और सामाजिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ग्रामीण गरीबों, किसानों, खेत मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
