उच्च शिक्षा केवल डिग्रियों का कारखाना नहीं होती, बल्कि वह समाज की चेतना, समानता और राष्ट्रीय एकता का दर्पण भी होती है. ऐसे में यदि उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नियम ही समाज को बांटने की आशंका पैदा करने लगें, तो न्यायपालिका का हस्तक्षेप न केवल आवश्यक बल्कि अनिवार्य हो […]
संपादकीय
संपादकीय
गुरुवार को संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक यात्रा का आत्मविश्वास से भरा बयान भी है. 1 फरवरी को आने वाले केंद्रीय बजट से ठीक पहले पेश किया गया यह सर्वेक्षण सरकार की प्राथमिकताओं, चुनौतियों और दीर्घकालिक दृष्टि को […]
अठारह वर्षों की लंबी कूटनीतिक प्रतीक्षा, असंख्य दौर की वार्ताओं और बदलते वैश्विक समीकरणों के बाद मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते का संपन्न होना केवल एक आर्थिक घटना नहीं है, बल्कि इक्कीसवीं सदी की वैश्विक शक्ति-संतुलन राजनीति में एक निर्णायक मोड़ भी है. प्रधानमंत्री […]
किसी भी देश के गणतंत्र का 77 वां गणतंत्र दिवस इस बात के लिए अत्यंत अहम रहता है कि लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्यों को किस तरह आत्मसात किया जा रहा है. देश में गण की आवाज में जनता के सुर किस तरह मिल रहे हैं और तंत्र इन संयुक्त सुरों […]
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) 2026 के मंच से जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को ‘रणनीतिक निवेश केंद्र’ के रूप में प्रस्तुत किया, तो यह केवल एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि राज्य की बदली हुई आर्थिक आत्मविश्वास का उद्घोष था. दावोस जैसे वैश्विक मंच पर मध्य प्रदेश […]
बुधवार को स्विट्जरलैंड के दाओस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच का मंच आमतौर पर वैश्विक सहयोग, मुक्त व्यापार और बहुपक्षीय संवाद का प्रतीक माना जाता है. लेकिन इस बार यही मंच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे बयानों का साक्षी बना, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. ग्रीनलैंड को […]
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक शिष्टाचार या पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं रहे हैं. यह साझेदारी तेजी से रणनीतिक आर्थिक गठजोड़ में बदल चुकी है. हालिया उच्च स्तरीय बैठकों और समझौतों ने साफ कर दिया है कि भारत और यूएई के व्यापारिक संबंध अपने स्वर्णिम […]
नितिन नबीन द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालना केवल एक संगठनात्मक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भाजपा की वैचारिक निरंतरता, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य दृष्टि का स्पष्ट संकेत भी है. इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की […]
भारत की संघीय व्यवस्था में राज्यों की वित्तीय स्थिति केवल लेखा-जोखा भर नहीं है, बल्कि यह विकास की गति, सामाजिक स्थिरता और राजनीतिक परिपक्वता का भी आईना है. वर्ष 2025-26 के बजट अनुमानों और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की स्टेट फाइनेंस ; ए स्टडी ऑ$फ बजेट्स रिपोर्ट यह स्पष्ट […]