​सीहोर में 6 घंटे का शेड्यूल और 9 घंटे की कटौती, उमस में बेहाल जनता; करंट से मवेशियों की मौत

सीहोर। मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली कटौती के बावजूद शहर में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है. बीते कुछ दिनों में करंट उतरे बिजली के खंभों और डीपी की चपेट में आने से कई मूक मवेशियों की मौत हो चुकी है. लगातार हो रही इन घटनाओं ने विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं.

शहर में बिजली के खंभों और विद्युत उपकरणों में उतर रहे करंट के कारण मूक मवेशियों की जान लगातार खतरे में पड़ रही है. बीती रात शुगर फैक्ट्री चौराहे के समीप एक नंदी की बिजली के खंभे में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई. इससे पहले तीन दिन पूर्व आराकश चौराहे के पास स्थित एक निजी स्कूल के समीप लगे बिजली के खंभे में करंट उतरने से एक गौमाता की दर्दनाक मौत हो गई थी। इन दोनों घटनाओं ने शहर में विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. इतना ही नहीं, कुछ समय पहले चाणक्यपुरी क्षेत्र में भी विद्युत डीपी की बाउंड्री में करंट फैलने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि शहर में कई स्थानों पर बिजली के खंभे, डीपी और अन्य विद्युत उपकरण आम लोगों और मूक पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लगभग प्रतिदिन कई घंटों तक मेंटेनेंस के नाम पर बिजली आपूर्ति बंद रखी जाती है. लेकिन इसके बावजूद पहली ही तेज हवा, हल्की बूंदाबांदी या बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है. इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मेंटेनेंस के नाम पर होने वाला कार्य कितना प्रभावी है. नागरिकों का आरोप है कि यदि समय-समय पर बिजली के खंभों, अर्थिंग व्यवस्था, डीपी और विद्युत लाइनों की तकनीकी जांच ईमानदारी से की जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी रोक लगाई जा सकती है. बरसात के मौसम में करंट फैलने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है.

धार्मिक संगठनों व लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विद्युत वितरण कंपनी ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है. मूक मवेशियों की लगातार हो रही मौतें केवल पशु हानि नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत हैं, जिस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है.

पूरे नौ घंटे बाद दी बिजली ने दस्तक

रविवार का दिन हाउसिंग बोर्ड कालोनी, अवधपुरी, चाणक्यपुरी और वैशाली नगर सहित अन्य क्षेत्रों के रहवासियों के लिए काफी तकलीफदेह साबित हुआ. मेंटेंनेस के नाम पर रविवार की सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक घोषित बिजली कटौती का शेड्यूल जारी किया गया था. दोपहर 12 बजे के बाद भी जब बिजली नहीं आई तो गर्मी व उमस से परेशान लोगों ने विद्युत कंपनी के जिम्मेदारों को कॉल करना शुरू किए. वह भी नहीं बता पा रहे थे कि बिजली कब आएगी. जिससे लोगों में आक्रोश का माहौल बना रहा. दोपहर तीन बजे इन क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था बहाल हो सकी.

 

 

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