महंगाई और मौसम की दोहरी मार का खतरा: वैश्विक तनाव और कम मानसून बढ़ा सकते हैं आपकी रसोई का बजट, क्रिसिल की रिपोर्ट ने दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली | क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 45% तक बढ़ गईं, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में खुदरा महंगाई पर इसका असर फिलहाल सीमित है। सरकारी नीतियों और एक्साइज ड्यूटी में कटौती के चलते मार्च में उपभोक्ता महंगाई दर (CPI) मामूली बढ़त के साथ 3.4% दर्ज की गई है, जो वैश्विक संकट के मुकाबले काफी कम है।

महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधे झटके से बचाया जा सका। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने और उत्पाद शुल्क में कटौती करने से मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। इसके अलावा, सोने-चांदी की कीमतों में सुधार और कोर इन्फ्लेशन के 3.7% पर स्थिर रहने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में अब तक कोई बड़ा अनियंत्रित उछाल देखने को नहीं मिला है।

क्रिसिल ने आगाह किया है कि यदि वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है, तो आगामी वित्त वर्ष में औसत महंगाई 4.7% तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही, मौसम विभाग (IMD) द्वारा इस वर्ष ‘सामान्य से कम’ मानसून और अल-नीनो के प्रभाव की भविष्यवाणी की गई है। कम बारिश और लू के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने से खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने का बड़ा खतरा है। परिवहन लागत और हवाई किराए में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जो भविष्य में अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

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