हाँ, हूँ मैं एक नई नारी!!
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सार्थकता और सफलता तब है जब हर उम्र की महिला बिना डरे छोटे छोटे सपने देख सके, कल्पनाओं की उड़ान भर सके, थोड़ा सा अपने लिए जी सके, अपने पंख फैला सके बिना अपने आप को दोषी समझे। महिला का जीवन केवल एक बेटी, बहू, पत्नी, माँ के रूप में ही नहीं बल्कि उसका खुद का एक सम्मानजनक अस्तित्व बने रहने में है। एक स्वतंत्र पहचान बने केवल दूसरों के सामने ही नहीं बल्कि स्वयं की दृष्टि में भी ।
आपसे मैं इस महिला दिवस पर अपनी चाहत साझा करूँ, कुछ बहुत बड़ा नहीं सोचा है कुछ छोटी छोटी बाते हैं जो मेरे जीवन को असली खुशी देकर बड़े सपने देखने का हौसला दे सकेंगी। और शायद आप भी मेरी ख्वाहिशों में अपनी ख्वाहिशों का अक्स देख पाएँगी ।
आज मैंने उम्र की पचासवीं पांयदान पर कदम रखा है, शायद आप भी रख चुकी होंगी या रखने वाली होंगी, यकीन मानिए अब आपका अपने आप से एक नया परिचय होने वाला है।जिंदगी का एक खूबसूरत नया मोड़। हंसते मुस्कराते हुए इस रास्ते पर निकल पडिये। पति काम में अत्यधिक व्यस्त हैं, जो बच्चे माँ को पुकारे बिना खाना, सोना, होम वर्क, क्या पहनें, प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर सकते थे आज घोंसला छोड़कर उड़ चुके हैं एक नए आसमान की खोज में। रीती आँखों एवं उदास मन लिए अपने को अनावश्यक एवं अनुपयोगी समझने की भूल न करें। अपने चारों तरफ देखिये कितना कुछ है करने के लिए। हाँ, इस बार आप ‘अपने’ लिए कुछ करेंगी। छोटी छोटी चीजों को करने या अनुभव करने में मिलने वाला सुकून या संतुष्टि शायद आप भूल चुकी थीं या यूँ कहें कि समय ही नहीं था इन लम्हों को जीने का।
बारिश की टिप टिप बूँदों की आवाज़ सुनते हुए सवेरे की चाय पीजिये,पौधे लगाईये नई कोंपलों को देखकर आनंद महसूस करें, सकोरे से पानी पीती हुई चिडि़याओं को देखकर एक अभिव्यक्त न कर पाने वाली खुशी को महसूस कीजिये। जिन पुराने शौकों एवं अभिरुचियों को व्यस्तताओं ने अंतरमन के किसी गहरे कोने में दबा दिया था उन्हें वहां से निकालिए।
गीत संगीत, नृत्य, चित्रकला, अपनी पुरानी हँसी को फिर से अपने जीवन में लौटा कर लाइए और निर्मल आनन्द प्राप्त कीजिये। जुम्बा, अक्वा योगा ये सिर्फ किसी पत्रिका के फोटो शूट को हसरत भरी निगाहों से देखने के लिए नहीं है। कुछ नया करने का रोमांच महसूस करें। इस बार जब यात्रा पर जाएँगी झरनों की कलकल, नदियों की शीतलता, समुन्दर की उठती गिरती लहरें, पहाड़ों की चोटियाँ सबका सौन्दर्य हृदय के अंतर तक दृष्टिगत होगा, लौटकर अपने को एकदम ताज़ादम पाएँगी।
पहले भी आपने बच्चों के साथ घूमना फिरना किया है, वह एक अलग आनन्द था पर अब जीवन के इस पड़ाव को नई नज़र से देखें, महसूस करें और पूरा पूरा आनंद उठाएं।
स्कूल – कॉलेज के पुराने सहपाठियों से नाता फिर से जोडिये, वे रिश्ते जो आपकी जिम्मेदारियों के तले दबकर कहीँ खो गए थे उन्हें पुनर्जीवित करें। देखिए तो पुराने साथी आपके अंदर का खिलंदडीपन कैसे बाहर निकाला कर लाते हैं।
उम्र के विभिन्न पड़ावों के भिन्न भिन्न प्रकार के कर्तव्य व जिम्मेदारियां होती हैं और समयोचित व्यवहार की आशा भी। पर आज आप जिस पायदान पर खड़ी हैं ये अपेक्षाएँ खत्म तो नहीं किन्तु कम से कम हैं। तो बस देर न करें एक “नई मैं” को पहचाने, उससे मुस्करा कर मिलें, जान पहचान करें और निकल पड़ें ज़िन्दगी की टेढ़ी मेढी पगडंडियों पर गर्व और खुशी से चलते हुए कहिए ‘हाँ, हूँ मैं एक नई नारी’! और इस महिला दिवस पर बड़े बड़े लक्ष्यों तक पहुंचाने वाले छोटे छोटे कदम उठा कर बढ़े चलें ।
महिमा वर्मा
