नई दिल्ली: 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने देश में बढ़ती लिवर संबंधी बीमारियों को लेकर चिंता जताई है। खासतौर पर फैटी लिवर की समस्या अब तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है।एम्स नई दिल्ली से प्रशिक्षित जीआई सर्जन डॉ. कार्तिक साहनी के अनुसार, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज (MASLD), जिसे पहले फैटी लिवर के नाम से जाना जाता था, शहरी आबादी में तेजी से फैल रही है। उनका कहना है कि शहरों में हर तीन में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापा, डायबिटीज, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। चिंता की बात यह है कि लिवर की बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है और कई बार गंभीर अवस्था जैसे सिरोसिस या लिवर कैंसर में पहुंचने के बाद ही इसका पता चलता है।फैटी लिवर के शुरुआती संकेतों में थकान, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द और वजन बढ़ना शामिल हैं, जबकि गंभीर स्थिति में पीलिया, पेट और पैरों में सूजन तथा खून की उल्टी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच कराने से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन जैसी जांच कारगर मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, शराब से परहेज और हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ल्ड लिवर डे के अवसर पर लोगों से अपने लिवर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समय-समय पर जांच कराने की अपील की गई है।
