हॉर्मुज जल डमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धडक़न है और यही कारण है कि इसका बंद होना दुनिया के लिए खतरे की घंटी बन जाता है. मौजूदा हालात में “स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलना चाहिए” कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि आर्थिक अनिवार्यता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा इस जलमार्ग को दोबारा बंद करने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है. हॉर्मुज जल डमरू मध्य से दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है. ऐसे में यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो इसका सीधा असर न केवल तेल की कीमतों पर पड़ता है, बल्कि पूरी वैश्विक सप्लाई चेन पर झटका लगता है.
आज की दुनिया ऊर्जा-निर्भर अर्थव्यवस्था है. तेल और गैस की कीमतों में उछाल का मतलब है,महंगाई, उत्पादन लागत में वृद्धि और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ. भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं. हॉर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडराने लगता है, जिससे आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है. वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है और हॉर्मुज एक महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है. जब यहां जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो बीमा लागत बढ़ जाती है, शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक और लंबे मार्ग अपनाने लगती हैं, जिससे समय और लागत दोनों में वृद्धि होती है. इसका असर अंतत: वैश्विक व्यापार और उपभोक्ता बाजारों पर पड़ता है. खाड़ी युद्ध ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है. हालांकि युद्धविराम की कोशिशें हुई हैं, लेकिन विश्वास की कमी और रणनीतिक हितों के टकराव ने समाधान को दूर कर दिया है. ईरान का यह कदम, भले ही उसकी संप्रभुता और प्रतिबंधों के खिलाफ विरोध के रूप में देखा जाए, लेकिन इसका वैश्विक प्रभाव कहीं अधिक व्यापक और चिंताजनक है. यह भी समझना होगा कि हॉर्मुज का सैन्यीकरण किसी के हित में नहीं है. यदि यह संकट और गहराता है, तो यह केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले सकता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय,विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, जी -20 और प्रमुख शक्तियों को तत्काल हस्तक्षेप कर कूटनीतिक समाधान तलाशना होगा. भारत जैसे देशों की भूमिका यहां महत्वपूर्ण हो सकती है. एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भारत को संतुलित कूटनीति अपनाते हुए शांति और स्थिरता के प्रयासों को समर्थन देना चाहिए. साथ ही, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण पर भी ध्यान देना होगा, ताकि ऐसे संकटों का असर कम किया जा सके. कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना केवल व्यापारिक सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि की शर्त है. यदि यह मार्ग बंद रहता है, तो दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. इसलिए यह समय है कि टकराव की राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग और संवाद का रास्ता अपनाया जाए,क्योंकि हॉर्मुज का खुला रहना, दुनिया के भविष्य के लिए अनिवार्य है.
