नयी दिल्ली, 7 फरवरी (वार्ता) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्षेत्र (आईसीटी) उत्पादों एवं कंप्यूटर आदि के आयात के बारे में पूछे गए एक सवाल पर शनिवार को कहा कि यह उन देशों के समक्ष अपने हितों की रक्षा करने के लिए है जो क्षति पहुंचाने के लिए लागत से कम कीमतों पर सामान बेचते हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसा देश जहां श्रम की लागत संभवत: भारत की तुलना में 50 गुना ज्यादा है, जहां प्रति व्यक्ति आय करीब 90 हजार डालर है उसका भारत से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।
वाणिज्य मंत्री ने कहा, ”अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें निश्चित रूप से बहुत से एनविडिया के चिप जैसे, बहुत आईसीटी उत्पादों की जरूरत होगी। हमें दुनिया की घटनाओं के प्रति जागृत रहना है, अपने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को विश्वस्तर पर मजबूत रखना है तो निश्चित रूप से (उन्नत सुरक्षित) आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस (एआई) उपकरणों और डेटा सेंटर की जरूरत होगी। यह भारत की बड़ी सफलता है कि अमेरिका हमें ये सभी आईसीटी उत्पाद देने को तैयार हो हमारे देश के लिए समय की जरूरत हैं।”
उन्होंने कहा, ”यह समझौता मेक इन इंडिया पहल को मदद करेगा क्योंकि अमेरिका में श्रम की लागत ऊंची है और इस कारण से वहां की कंपनियां बहुत से उत्पादों का विश्व बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी दर पर विनिर्माण नहीं कर पाती हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे में अमेरिका के नवप्रवर्तकों के लिए अमेरिका में ही विनिर्माण करने और भारत जैसी सफल और विश्वसनीय लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं से सहयोग कर विश्व बाजार के लिए मिलकर काम करने का मौका है। भारत और अमेरिका एक दूसरे के पूरक है, स्पर्धी नहीं हैं।
