स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन का आधार

स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन का आधार

वायु और जल प्रदूषण आज दुनिया के सबसे बड़े ‘मूक हत्यारों में शामिल हैं। इनके दुष्प्रभाव धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुँचाते हैं और अक्सर लोगों को तब तक पता नहीं चलता, जब तक गंभीर बीमारी सामने न आ जाए। यही कारण है कि वैश्विक अध्ययनों के अनुसार हर वर्ष लगभग 90 लाख (9 मिलियन) लोगों की मौत प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रदूषण का असर तुरंत दिखाई नहीं देता, बल्कि यह वर्षों तक शरीर में जमा होकर गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है। इसलिए जागरूकता, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, पेड़ लगाना, शुद्ध पानी का सेवन और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन ही इस ‘मूक खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

सर्दियों के मौसम में हवा क्यों होती है प्रदूषित?

सर्दी में तापमान कम होने के कारण हवा ठंडी हो जाती है. ठंडी हवा गर्म हवा की तुलना में भारी होती है और नीचे की ओर डूबती है. इससे हवा की वर्टिकल स्पीड कम हो जाती है और प्रदूषित तत्व हवा में ही फंसे रह जाते हैं. इसके अलावा सर्दियों में हवा में नमी कम होती है. नमी प्रदूषित कणों को आपस में चिपकाने में मदद करती है और उन्हें जमीन पर गिरने में मदद करती है, लेकिन जब नमी कम होती है तो प्रदूषक कण हवा में ही तैरते रहते हैं.

इसके अलावा कभी-कभी एक अजीब सी स्थिति बन जाती है जिसे उलटा तापमान कहते हैं. इसमें ऊंचाई के साथ तापमान बढऩे लगता है, जबकि आमतौर पर ऊंचाई के साथ तापमान घटता है. इस स्थिति में गर्म हवा नीचे की ठंडी हवा को दबा देती है जिससे प्रदूषित कण हवा में ही फंसे रह जाते हैं. वहीं सर्दियों में धुंध और कोहरा छाना आम बात है. ये प्रदूषक कणों को अपने अंदर समेट लेते हैं और हवा में घुल मिल जाते हैं जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है.

वायु प्रदूषण और स्मॉग से होने वाली मुख्य समस्याएं:
श्वसन संबंधी बीमारियां: अस्थमा का दौरा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (ष्टह्रक्कष्ठ), ब्रोंकाइटिस, और फेफड़ों के संक्रमण, जो सांस लेने में बहुत कठिनाई पैदा करते हैं।
हृदय और रक्त संचार: हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
आंखों, नाक और गले में जलन: आंखों में लालिमा, जलन (ष्ठह्म्4 श्व4द्ग स्4ठ्ठस्रह्म्शद्वद्ग), गले में खराश, और लगातार खांसी होना।
त्वचा और बाल: त्वचा पर एलर्जी, रैशेज, और बालों का झडऩा।
दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव: फेफड़ों के कैंसर, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, और बच्चों में फेफड़ों का विकास धीमा होना।
मानसिक और शारीरिक थकान: एकाग्रता में कमी और लगातार सिरदर्द।
बचाव के उपाय:

घर के अंदर वायु की गुणवत्ता सुधारें
घर के अंदर वायु की गुणवत्ता अच्छी रखने से आप खुद को व बाहरी प्रदूषण से बचा सकते हैं।घर में तुलसी, एलोवेरा और मनी प्लांट जैसे पौधे लगाने से भी वायु शुद्ध रहती है। ये पौधे प्राकृतिक तरीके से हवा की शुद्धता बढ़ाते हैं।

घरेलू सामग्रियों से प्राकृतिक मास्क तैयार करें
बाहर जाते समय मास्क पहनना बेहद आवश्यक है, खासकर हn95 मास्क जो छोटे-से-छोटे कणों को भी रोक सकते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग घर पर भी प्राकृतिक मास्क बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप रुमाल में टी ट्री ऑइल की कुछ बूंदें डाल सकते हैं जो बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कणों को रोकने में सहायक होता है। यह एक सस्ता और असरदार घरेलू उपाय है।

संयंत्रों का उपयोग बढ़ाएं
घर में ऐसे पौधे लगाना चाहिए जो प्रदूषण को कम करने में सहायक हों। एरेका पाम, स्नेक प्लांट, और पीस लिली जैसे पौधे हवा से हानिकारक केमिकल्स को सोखने में सक्षम होते हैं। हृ्रस््र ने भी इन पौधों को एयर प्यूरिफिकेशन के लिए बेहद कारगर माना है। ये न केवल प्रदूषण कम करते हैं बल्कि घर की सुंदरता भी बढ़ाते हैं।

खानपान में बदलाव करें
प्रदूषण से निपटने के लिए शरीर के अंदर से मजबूत होना जरूरी है। अपने खानपान में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें जो एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर हों। फल, सब्जियाँ, विशेष रूप से विटामिन ष्ट और विटामिन श्व युक्त खाद्य पदार्थ जैसे संतरा, बादाम, और पालक, शरीर को विषाक्त तत्वों से लडऩे में मदद करते हैं। इसके अलावा, दिन भर में पानी की मात्रा भी बढ़ानी चाहिए ताकि शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकलते रहें।

स्मार्ट तरीके से घर की सफाई करें
घर की सफाई में हम कई बार ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं जिनसे प्रदूषण बढ़ता है, जैसे कि केमिकल क्लीनर। इनकी बजाय आप बेकिंग सोडा और सिरके जैसे प्राकृतिक क्लीनर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, नियमित सफाई से घर में धूल और गंदगी जमा नहीं होती है, जो वायु प्रदूषण को कम करने में मददगार होती है।

प्रदूषण से बचाव के ये उपाय अपनाएं

बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सेहत को कई प्रकार के खतरे हो सकते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर खुद को प्रदूषण से बचा सकते हैं। वायु प्रदूषण से बचाव के ये उपाय न केवल आसान हैं बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। पर्यावरण में हो रहे बदलावों के बीच यह जरूरी है कि हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें और इन सरल उपायों को अपनाकर जीवन को स्वच्छ और स्वस्थ बनाएँ।

क्या न करें?
पत्तियों, लकडिय़ों, फसल अवशेष और कूड़े को न जलाएं
जहाँ ज़्यादा भीड़ हो और ट्रैफिक वाली जगहों से बचें
सुबह और शाम की सैर पर न निकलें
सुबह और शाम के समय अपने घर की खिड़किया और दरवाज़े न खोलें
सिगरेट, बीड़ी और तम्बाकू जैसे उत्पादों का उपयोग न करें
कार, स्कूटर्स और अन्य मोटर वाहनों को न चलाएं

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घरों और उद्योगों के निकलने वाला कचरा ज्यादातर नदी में जाता है, जिसके कारण नदी का पानी दूषित हो जाता है और यही दूषित पानी लोगों के घरों में इस्तेमाल होता है। इस पानी के इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं और पानी में रह रहे जीव-जंतुओं को भी हानि पहुँचता है।

 

दूषित जल से होने वाली मुख्य बीमारियाँ:
हैजा : यह एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है जिससे तेज़ दस्त और निर्जलीकरण होता है, यह जानलेवा हो सकता है

टाइफाइड : साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है, जिससे लंबे समय तक बुखार, कमजोरी और पाचन संबंधी दिक्कतें आती हैं.

पेचिश : यह भी दूषित पानी से फैलती है और पेट में ऐंठन और दस्त का कारण बनती है.

दस्त : यह बच्चों में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है और अक्सर दूषित पानी पीने का सीधा नतीजा है.
हेपेटाइटिस ए : यह हेपेटाइटिस ए वायरस से होता है, जो लिवर में सूजन और पीलिया का कारण बनता है.

पोलियो : पोलियोवायरस भी दूषित पानी के माध्यम से फैल सकता है.
गियार्डियासिस : यह परजीवी के कारण होता है और पेट से जुड़ी समस्याएँ पैदा करता है.
ट्रेकोमा: गंदे पानी से आँख धोने से ट्रेकोमा हो सकता है, जिससे अंधापन भी हो सकता है.

जल प्रदूषण से बचाव के मुख्य घरेलू उपाय

1. अपशिष्ट प्रबंधन सही रखें
पेंट, तेल, कीटनाशक, केमिकल और पुरानी दवाइयों को कभी भी सिंक या टॉयलेट में न बहाएं। इन्हें निर्धारित कचरा संग्रह केंद्र पर ही दें।

2. प्लास्टिक का कम उपयोग करें
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचें और प्लास्टिक कचरे को जल स्रोतों, नालियों या खुले स्थानों में न फेंकें।

3. कार और आंगन की सफाई का ध्यान रखें
कार को व्यावसायिक वॉश सेंटर पर धुलवाएं या ऐसी जगह धोएं जहाँ पानी मिट्टी या घास में समा सके, न कि नाली में जाए।

4. पालतू जानवरों के मल का सही निस्तारण
पालतू पशुओं के मल को इधर-उधर न छोड़ें और उसे नदियों, तालाबों या नालियों में न बहाएं।

5. सेप्टिक टैंक की नियमित सफाई
यदि घर में सेप्टिक टैंक है तो उसकी समय-समय पर सफाई कराएं, ताकि गंदा पानी भूजल में न मिले।

6. पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का उपयोग
सफाई के लिए हानिकारक रसायनों की जगह प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल करें।

7. जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
पानी की बर्बादी रोकें और वर्षा जल को संरक्षित करने की व्यवस्था करें।

8. कचरा नालियों में न डालें
पत्तियां, मिट्टी और यार्ड का कचरा नालियों में डालने से जल निकासी रुकती है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।

 

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