जुकाम और खांसी के आयुर्वेदिक घरेलू इलाज

प्रकृति त्रिगुणात्मक है। शरीर भी। तीन तत्व वात पित्त और कफ के असमान होने पर शरीर बनता है। यह तीनों तत्व शरीर में अनेक अच्छे काम करते हैं, किंतु इनमें से एक भी तत्व की बहुत कमी या बहुत अधिकता या विकृति हमें रोगी बना देती है। अच्छा कफ जोड़ों में स्नेहन अर्थात लुब्रिकेंट का काम करता है त्वचा में नमी बनाए रखता है कब्ज नहीं होने देता धैर्य के गुण को बढ़ाता है बालों और नाखूनों को चमकदार और मुलायम रखता है चेहरे और त्वचा का तेज बनाए रखता है। कफ तत्व की अधिकता हमारे अंदर मोटापा और निष्क्रियता बढ़ाती है। यूं तो कफ स्वाद में मीठा होता है परंतु विकृत होने पर यह नमकीन हो जाता है। इसलिए हमारा बलगम नमकीन होता है। कफ की विकृति के कारण लोग मोटे भी होते हैं और दुबले भी। क्योंकि विकृत कफ शरीर में भरा रहे तो वजन बढ़ता है और कफ विकृत हो हो कर उसकी निकासी होती रहे तो आवश्यक कफ तत्व की कमी के कारण व्यक्ति दुबला भी हो जाता है। विकृत कफ शरीर की नस नाडय़िों में भर जाए तो यह बच्चों में सर्दी खांसी और बड़ों में मधुमेह, हाइपोथाइरॉएड, एलर्जी, अस्थमा, स्थूलता जैसे अनेक रोगों का कारण बनता है। यदि आपको सर्दी जुकाम हो जाए और बहुत दिनों तक ठीक न हो तो यह समझें कि, लगातार आपके शरीर के अंदर कफ विकृत होता जा रहा है।
बदलती हुई ऋतु को ध्यान में रखते हुए सभी अपने फेफड़े नाक कान और गले को विशेष रूप से संभाल कर रखें इस ऋतु में बार-बार सर्दी होती है सर्दी को दबाने वाली दवाइयां खाने से सर्दी बिगड़ भी जाती है फिर किसी को सिर दर्द किसी को सूखी खांसी किसी को सांस फूलना इत्यादि समस्याएं होती हैं। इसी दिशा में आगे मधुमेह, हाइपोथाइरॉएड, एलर्जी, अस्थमा, स्थूलता आदि भी होता है। लोग यह सब समझ नहीं पाते कि हमें यह क्यों हुआ। सच्चाई यह है कि शरीर में जमा विकृत कफ दोष ही वजन बढ़ता है, फेफड़ों और थायराइड ग्रंथि की क्रियाशीलता कम करता है, शरीर में हिस्टामाइन नाम का प्रोटीन बढ़ाकर एलर्जी प्रकट करता है, यही यूसीनोफिल बढ़ाकर छींकें लाता है।आयुर्वेद में सर्दी, जुकाम, खांसी की हर स्थिति के लिए अलग उपचार है आपको वह सब समझने की आवश्यकता है, ताकि आपको जब जैसा सर्दी जुकाम खाँसी आदि हो, उसके अनुसार आप स्वयं वैसा उपचार कर सकें।
सर्दी जुकाम की घटना अनेक चरणों में होती है। हर एक चरण का अलग उपचार होता है।
1. गला दर्द – काली मिर्च नमक में मिलाकर चाटें और उस ओर से निगलें जिस ओर गला दर्द कर रहा है।
2. सूखी खाँसी- थोड़ा सा अमृतधारा डालकर गर्म पानी पी लें।
3. आंख, नाक, कान, गला सब कुछ खुजलाना- आधा चम्मच सोंठ के साथ गर्म पानी पी लें।
4. नाक बहने वाला जुकाम- अदरक का रस निकालें और बराबरी से शहद मिलाकर एक एक चम्मच दिन भर में पांच-छह बार ले लें।
5. जुकाम के साथ बुखार भी- अन्य उपचारों के अतिरिक्त अजवाइन का उबला पानी ही दिन भर गुनगुना करके पिएं।
6. कफ गाढ़ा होने के बाद नाक बंद हो जाना, फेफड़ों में कफ भर जाना- छाती गले पीठ और गर्दन पर अमृतधारा लगाकर सोएं। सूती मास्क पर अमृतधारा बाहर से लगाएँ और दिन रात मास्क मुंह पर लगा कर रखें। नियमित रसाहार अडूसा, गिलोय, तुलसी, ग्वारपाठा, हल्दी लें।
7. सूती मास्क पर अमृतधारा बाहर से लगाएँ और दिन रात मास्क मुंह पर लगा कर रखें।
8. प्रात: और रात्रि में पिप्पली चटनी अवश्य लें। अधिक कष्ट हो तो पिप्पली चटनी दिन में 6-7 बार और आवश्यक हो तो रात में भी लें।
9. आवाज बैठ जाए तो अडूसा गिलोए रस अवश्य लें। दोनों समय भोजन के बाद सोंठ गुड़ घी अवश्य खाएं। उपरोक्त सभी स्थितियों में दो समय काढ़ा अवश्य लेना चाहिए।
10. नाक और गले से रक्त भी आता हो या पुराना कफ हो, अस्थमा या एलर्जी हो जाए, तो लंबे समय तक रसाहार, काढ़ा और पिप्पली चटनी लें।
इन सब स्थितियों में सिर या शरीर गीला रखकर तेज हवा न लगने दें। इनमें से किसी भी अवस्था में दूध या दूध से बने पदार्थ, तले हुए पदार्थ, आइसक्रीम, इमली, कैरी, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक या बेकरी पदार्थ अपथ्य हैं। प्रात: देर तक सोने या रात को देर तक जागने से अधिक परेशानी होगी।
खांसी तब अधिक होती है।
1. जब जुकाम होने वाला हो।
2. जब जुकाम होकर ठीक हो गया हो, लेकिन कफ बना हुआ रहे।
3. जब आप सुबह देर से उठे और आपकी श्वास नली से स्वाभाविक रूप से सुबह कफ न निकल सके।
उन सबके लिए उपचार
1. नमक के गरारे करें
2. पिप्पली चटनी चाटें।
3. ग्वारपाठा का रस लें।
4. सोते समय यदि खांसी आए तो थोड़ा सा कत्था मुंह में रखकर चूसते रहें।
5. लौंग भूनकर पीसकर चुटकी भर मुंह में रखकर चूसते रहें।
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