‘दो दीवाने सहर में’ के साथ सिद्धांत चतुर्वेदी बने भंसाली के आइकॉनिक हीरो

मुंबई, 07 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी, संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘दो दीवाने सहर में’का सिर्फ हिस्सा नहीं बने हैं, बल्कि इस फिल्म के ज़रिए उन्होंने अपने दमदार अभिनय, भावनात्मक समझ और मज़बूत स्क्रीन प्रेज़ेंस के साथ अपने करियर को एक अहम और नया मोड़ दिया है। संजय लीला भंसाली ने अपने करियर में सिर्फ़ फिल्में नहीं बनाई हैं, बल्कि सिनेमा की एक अलग ही दुनिया रची है। उनकी फिल्मों में एक खास तरह की भव्यता और भावनात्मक गहराई होती है, जो दर्शकों के दिलों में लंबे समय तक बस जाती है। भंसाली के सिनेमा में नायक सिर्फ़ कहानी का हिस्सा नहीं होते, बल्कि ऐसे किरदार बन जाते हैं जिन्हें लोग सालों तक याद रखते हैं। उनके नायकों में जुनून होता है, तो दर्द भी, मजबूती होती है, तो नाज़ुकपन भी। फिलहाल ‘दो दीवाने शहर में’ के ज़रिये सिद्धांत चतुर्वेदी ने भंसाली यूनिवर्स में कदम रखा है।

संजय लीला भंसाली की फिल्मों के नायक हमेशा खास होते हैं। वे ताक़तवर होने के साथ, भीतर से टूटे हुए भी होते हैं। प्रेम उनके जीवन का केंद्र भले हो, लेकिन कर्तव्य और संघर्ष उनकी पहचान होते हैं। ये किरदार सिर्फ़ परदे तक सीमित नहीं रहते, बल्कि फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के ज़हन में बने रहते हैं।
हम दिल दे चुके सनम में सलमान ख़ान का ‘समीर’ आज भी याद किया जाता है। वह एक भावुक, जल्दबाज़ और सच्चे प्रेम में डूबा हुआ इंसान है। इस किरदार ने भंसाली के आधुनिक नायकों की नींव रखी, जो अपनी कमज़ोरियों के साथ भी बेहद सच्चा लगता है। फिल्म ‘गुज़ारिश’ में ऋतिक रोशन ने बेहद संयमित और गहराई भरा अभिनय किया है। दर्द और गरिमा के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने साबित किया कि खामोशी भी उतनी ही असरदार हो सकती है जितनी भव्यता।

बाजीराव मस्तानी और पद्मावत में भंसाली के साथ रणवीर सिंह का सफ़र बेहद दमदार रहा है। ‘बाजीराव मस्तानी’ में बाजीराव और ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी के किरदारों में उन्होंने जुनून, पागलपन और त्रासदी को पूरी शिद्दत से जिया। यही वजह है कि उनकी ये भूमिकाएँ उन्हें भंसाली के सबसे यादगार अभिनेताओं में शामिल करती हैं। भंसाली की आगामी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में रणबीर कपूर एक ऐसे नायक के रूप में नज़र आनेवाले हैं, जो भीतर से उलझा हुआ है। ‘सांवरिया’ के बाद इस फिल्म में भी रणबीर कपूर की संजीदा और भावनात्मक अभिनय शैली, भंसाली के सिनेमा से अच्छी तरह मिलकर दर्शकों का मनोरंजन करेगी। इसी फिल्म में विक्की कौशल भी नजर आयेंगे। विक्की कौशल के किरदारों में सादगी, सच्चाई और भावनात्मक ताक़त दिखाई देती है, जो भव्य कहानियों को और ज़्यादा ज़मीन से जोड़ती है। ‘दो दीवाने सहर में’ के साथ सिद्धांत चतुर्वेदी, भंसाली सिनेमा में एक ऐसे नायक के रूप में उभरे हैं, जो अपनी आँखों से ही सारी बातें बयान करने का हुनर रखता है। फिल्म की झलकियों में वह एक संवेदनशील और भावुक प्रेमी के रूप में दिखाई देते हैं, जो शांत भी है और भीतर से गहराई से महसूस करने वाला भी। उनकी आँखों में एक अलग सी बेचैनी और सच्चाई दिखती है, जो भंसाली के नायकों की पहचान रही है।

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