
सतना . शहर के 70 वर्ष पुराने नारायण तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर स्मार्ट सिटी मद से करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं. लेकिन उसके एवज में हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता नगरवासियों को शर्मसार करने के लिए काफी है. आलम यह है कि महज 10 महीने पहले ही तकरीबन 10 करोड़ की लागत से बनाई गई नारायण तालाब की मेड़ पहली बारिश होते ही न सिर्फ उघडऩे लगी है बल्कि गहरी दरारें एक बार फिर से गंभीर हादसे को आमंत्रण देती नजर आ रही हैं.
शहर के नारायण तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य पिछले 4 वर्षे से जारी है. सौंदर्यीकरण से जुड़े विभिन्न कार्यों को लेकर स्मार्ट सिटी मद से अब तक करोड़ रु खर्च भी हो चुके हैं. इसी कड़ी में नारायण तालाब की मेड़ का कांक्रीटीकरण और मेड़ के ऊपर सडक़ निर्माण का कार्य भी पिछले वर्ष ही पूरा हो चुका है. लेकिन तालाब के सौंदर्यीकरण की गुणवत्ता कैसी है इसकी तस्दीक गहरी दरारों के साथ उघड़ती मेड़ और पैर की बिवाइयों की तरह फट पड़ी मेड़ के ऊपर की सडक़ के जरिए आसानी से की जा सकती है. मेड़ के उतैली की ओर बने नॉट वाले हिस्से की हालत तो इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी दिन गंभीर हादसा सामने आ सकता है. मेड़ पर बनाई गई दीवार कहने के लिए तो पक्की है लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि उंगलियों से छूते ही परतें उघडऩे लगती हैं.
