
इंदौर. तेज़ और लगातार बरसात से शहर के कोने-कोने में पानी भर जाता है. इसका बड़ा कारण निगम इंजीनियर्स द्वारा अनदेखी और लापरवही का नतीजा है जिनकी निगरानी में शहर में विकास कार्य तो किया गया लेकिन पानी की निकासी पर ध्यान नहीं दिया गया जिसका नतीजा यह हो रहा है कि छोटी-बड़ी बस्तियां तो पानी में लबालब हो जाती है. साथ ही पॉश कॉलोनियों और मुख्य सड़कें भी तालाब में तबदील हो जाती है. पिछले वर्ष बरसात के दौरान होने वाली मुसीबतों को देखने के बाद नगर निगम ने योजना बनाई थी. अब देखना यह होगा कि पिछले वर्ष बनाई गई. योजना इस वर्ष साकार होती है या हर बार की तरह पानी में बह जाती है.
इनका कहना है
सड़कों का निर्माण हुआ. हर तरफ विकास किया गया, फिर भी बरसात होते ही सड़क तालाब में तबदील क्यों हो जाती है. विकास की राह पर हम बहुत आगे हैं. इसका निराकरण होना चहिए.
अर्जुन सोनी
इस बार शहर पर पड़ने वाला मानसून से ही पता चलेगा कि पिछले वर्ष कितना सुधार किया गया जिससे शरह जल मग्न होने से बच जाए और जनता को बड़ी राहत मिल सके.
रवींद्र मिश्रा
हर बार बरसात आते ही निचली बस्तियों में पानी भरता है. राहत कार्य किया जाता है लेकिन वह कार्य नहीं किया जा रहा है जो बरसात के पानी की निकासी कर सकें.
राम रावल
