हर जिले का हो अलग पर्यावरण प्लान

इंदौर: संयुक्त आयुक्त विकास डी.एस. रणदा की अध्यक्षता में एआईसीटीएसएल सभागृह में जिला पर्यावरण नियोजन में जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास को समाहित करने संबंधी संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला को संबोधित करते हुए रणदा ने कहा कि पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव मनुष्यों और पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है. ग्लेशियर पिघल रहे हैं.

अगर हम अब भी नहीं चेते तो, आने वाली पीढ़ी कभी भी हमें माफ नहीं करेंगी.रणदा ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने जिले का पर्यावरण प्लान बनायें, जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन योजना, घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन योजना, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन योजना, वायु सूचकांक प्रबंधन योजना, ध्वनि प्रदूषण प्रबंधन योजना आदि विषय हों.
सभी को मिलकर काम करना होगा
क्लाईमेट ग्रुप दिल्ली की विषय विशेषज्ञ सुश्री शिखा धवन ने कहा कि बढ़ती आबादी, जंगलों का कटाव, नरवाई के जलाने, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और बढ़ते वाहनों की संख्या से प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है. एप्को के विषय विशेषज्ञ रवि शाह ने कहा कि बेहतर पर्यावरण के लिए सभी विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं, लेकिन कौन क्या कर रहा है, इसको लेकर ही यह कार्यशाला आयोजित की गई. ताकि हम अपने विचार एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें.

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