मुंबई, 07 फरवरी (वार्ता) बावेजा स्टूडियोज़ के निर्माता हरमन बावेजा और निर्देशक आरती कड़व आगामी फिल्म के लिये फिर से साथ आ रहे हैं।
बावेजा स्टूडियोज़ के निर्माता हरमन बावेजा और निर्देशक आरती कड़व, जिन्होंने हाल के वर्षों की सबसे सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों में से एक दी, अब एक नए प्रोजेक्ट के लिए फिर से हाथ मिला रहे हैं। फिल्म ‘मिसेज’ की पहली सालगिरह के मौके पर हरमन और आरती दोनों ने इंस्टाग्राम के ज़रिए इस री-यूनियन की जानकारी दी। ‘मिसेज’ बावेजा स्टूडियोज़ और आरती कड़व के लिए एक माइलस्टोन साबित हुई। संवेदनशील निर्देशन, दमदार लेखन और सधे हुए प्रोडक्शन के लिए फिल्म को खूब सराहा गया। वहीं सान्या मल्होत्रा की दिल को छू लेने वाली परफॉर्मेंस ने उन्हें कई अवॉर्ड्स दिलाए। इस फिल्म ने हरमन बावेजा को सिर्फ सार्थक सिनेमा का समर्थन करने वाले निर्माता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कहानीकार के रूप में भी स्थापित किया, क्योंकि वह इस प्रोजेक्ट के सह-लेखक भी थे।
हरमन बावेजा ने कहा, “मिसेज उन गिनी-चुनी फिल्मों में से है, जो बनने के बाद भी लंबे समय तक आपके साथ रहती है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, बल्कि इसलिए कि इसे पूरी ईमानदारी से बनाया गया। आरती के साथ काम करके मुझे फिर एहसास हुआ कि जब पूरी टीम एक ही सोच और संवेदनशीलता के साथ काम करती है, तो सिनेमा कितना ताकतवर हो सकता है।
पिछले एक साल में, जैसे-जैसे फिल्म ने अपना दर्शक और पहचान पाई, मेरा यह भरोसा और मज़बूत हुआ कि यही वो कहानियां हैं, जिन्हें मैं आगे भी सपोर्ट करना चाहता हूं। दोबारा साथ आना किसी री-यूनियन जैसा नहीं, बल्कि उस क्रिएटिव सफर का अगला स्वाभाविक कदम लगता है, जिस पर हमें पूरा भरोसा है। यह अगला प्रोजेक्ट उसी विश्वास से जन्मा है, और मैं फिर से साथ मिलकर सीमाएं आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हूं।”आरती कड़व ने कहा, “मिसेज बनाना भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन उतना ही संतोषजनक भी। इसका बड़ा श्रेय उस स्पेस को जाता है, जो हरमन और बावेजा स्टूडियोज़ ने मुझे एक फिल्ममेकर के तौर पर दिया। पूरा भरोसा, धैर्य और सुनने की इच्छा, ये खूबियां बहुत कम देखने को मिलती हैं और बेहद कीमती हैं। वक्त के साथ यह विश्वास और गहरा हुआ है। दोबारा साथ काम करना किसी नई शुरुआत जैसा नहीं लगता, बल्कि उस बातचीत को आगे बढ़ाने जैसा है, जो ईमानदारी, संवेदना और मायने रखने वाली कहानियां कहने के साझा विश्वास से शुरू हुई थी।”

