उज्जैन | प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर उज्जैन की धर्मनगरी पहुँचकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और प्रसिद्ध भस्म आरती में सम्मिलित हुए। बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करते हुए कहा कि महाकाल के प्रांगण में आना जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करने जैसा है। उन्होंने उज्जैन के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को ब्रह्मांड का जीवंत शिलालेख बताते हुए परमात्मा द्वारा सही राह दिखाने के लिए बार-बार अपने चरणों में बुलाए जाने की बात कही।
सनातन परंपरा और बदलता भारत
सनातन संस्कृति की महिमा का बखान करते हुए कैलाश खेर ने कहा कि भारत भूमि पर जन्म लेना परम सौभाग्य है। उन्होंने उज्जैन की ऐतिहासिक खगोलीय महत्ता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अपनी परंपराओं और विचारों पर अडिग है। गायक ने विश्वास जताया कि समय अब तेजी से बदल रहा है और आने वाला दौर भारत का ही है। उन्होंने अपनी बातों में भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा गर्व और सम्मान व्यक्त किया।
तीर्थ यात्राओं का आध्यात्मिक सफर
महाकाल के दर्शन से पूर्व कैलाश खेर ने 27 मई को बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का आशीर्वाद लिया था और सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा की तस्वीरें भी साझा की थीं। बद्रीनाथ से पहले उन्होंने केदारनाथ धाम पहुंचकर ‘बम लहरी’ गीत के माध्यम से शिव भक्ति प्रकट की थी। हाल ही में अपने नए गाने ‘जोगी’ के जरिए आदि शंकराचार्य को समर्पित आध्यात्मिक संदेश देने वाले कैलाश खेर अपनी इन निरंतर तीर्थ यात्राओं और भक्तिपूर्ण गीतों के माध्यम से प्रशंसकों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

