
ग्वालियर। तीन साल के मासूम की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायालय ने मां ज्योति राठौर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि पर्याप्त सबूत न होने पर उसके प्रेमी उदय इंदौलिया को बरी कर दिया। यह फैसला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया।
घटना थाटीपुर थाना क्षेत्र की है। ज्योति राठौर पड़ोस में रहने वाले अपने प्रेमी उदय इंदौलिया के साथ छत पर थी। इसी दौरान उसका बेटा जतिन छत पर पहुंच गया और उसने मां को प्रेमी की बाहों में देख लिया। इस बात के उजागर होने के डर से ज्योति ने जतिन को दो मंजिला छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक दिन इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। बच्चे के पुलिस कॉन्स्टेबल पिता ध्यान सिंह शुरुआत में इसे हादसा मानते रहे।
बेटे की मौत के बाद मां बोली कि सपने में बेटा आता है। बेटे जतिन की मौत के बाद ज्योति डरी-सहमी और घबराई हुई रहने लगी थी। वह रात में अचानक घबराकर जाग जाती थी। पति ध्यान सिंह को लगा कि पत्नी बेटे की मौत के गहरे सदमे में है। इसी वजह से उसे नींद नहीं आ रही है लेकिन ज्योति की हालत खराब होती चली गई। डॉक्टरों को दिखाने के बाद भी उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ज्योति के रात में जागने की वजह यह थी कि उसका मरा हुआ बेटा जतिन उसे बार-बार सपनों में दिखाई देता था। उसे आभास होने लगा था कि जतिन की आत्मा घर में भटक रही है। उसका जीना मुहाल हो जाएगा। इसी डर के चलते एक दिन उसने पति के सामने जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि गुस्से में उसने बेटे को छत से धक्का दे दिया था।
यह कबूलनामा सुनकर पुलिसकर्मी पति ध्यान सिंह खुद को रोक नहीं सका और उसने तय कर लिया कि वह अपनी पत्नी को सजा जरूर दिलाएगा। हालांकि, इस घटना का कोई प्रत्यक्ष सबूत या गवाह नहीं था। इसके चलते ध्यान सिंह ने पहले पत्नी ज्योति को विश्वास में लिया और उससे लगातार घटना को लेकर बातचीत करने लगा। साथ ही वह इन बातचीत को मोबाइल में रिकॉर्ड भी करने लगा। महिला की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज अहम सबूत बने।
