वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 केवल वार्षिक आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ता एक व्यावहारिक और दूरदर्शी आर्थिक रोडमैप है. वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और घरेलू अपेक्षाओं के बीच यह बजट संतुलन, निरंतरता और भविष्य उन्मुख सोच का परिचायक है. आर्थिक दृष्टि से यह बजट मांग सृजन, पूंजी निवेश और रोजगार निर्माण के तीनों स्तंभों को एक साथ साधने का प्रयास करता दिखता है.
इस बजट का सबसे मजबूत पक्ष बुनियादी ढांचे पर निरंतर भरोसा है. सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का प्रावधान कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत की विकास रणनीति अभी भी ‘कैपेक्स-ड्रिवन ग्रोथ’ पर आधारित रहेगी. इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का सीधा आर्थिक लाभ मल्टीप्लायर इफेक्ट के रूप में सामने आता है, जिससे सीमेंट, स्टील, लॉजिस्टिक्स और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ती है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होता है. रेलवे के लिए घोषित नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्री सुविधा का विस्तार हैं, बल्कि आर्थिक एकीकरण के साधन भी हैं. दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे कॉरिडोर व्यापारिक गतिविधियों को गति देंगे और क्षेत्रीय विकास की खाई को कम करेंगे. अमृत भारत 3.0 के तहत ट्रेनों के आधुनिकीकरण से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी प्रोत्साहन मिलेगा, विशेषकर कोच निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में.कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित हस्तक्षेप इस बजट की एक अहम विशेषता है. ‘भारत-विस्तार’ जैसे एआई टूल किसानों को मौसम, मिट्टी और फसल प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराएंगे. इससे उत्पादकता बढऩे के साथ-साथ जोखिम में कमी आएगी. आर्थिक रूप से यह पहल कृषि आय को स्थिर करने और ग्रामीण मांग को मजबूत करने में सहायक हो सकती है, जो समग्र अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. रोजगार और युवाओं पर केंद्रित प्रावधान इस बजट को सामाजिक-आर्थिक संतुलन प्रदान करते हैं. ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट’ समिति शिक्षा प्रणाली और उद्योग की जरूरतों के बीच लंबे समय से चली आ रही खाई को पाटने का प्रयास है. वहीं आईटी और डाटा सेक्टर में 20 लाख रोजगार की संभावना यह दर्शाती है कि सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए क्रिएटिव और डिजिटल इंडस्ट्री को रणनीतिक महत्व दे रही है. एमएसएमई सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड आर्थिक दृष्टि से अत्यंत निर्णायक है. छोटे और मझोले उद्योग भारत की रोजगार रीढ़ हैं. वैश्विक सप्लाई चेन दबावों के बीच इस सेक्टर को वित्तीय सुरक्षा देना घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता दोनों को मजबूत करेगा. टेक्सटाइल पार्कों की घोषणा पारंपरिक कौशल और आधुनिक बाजार के बीच सेतु का काम करेगी. महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रावधान इस बजट को समावेशी बनाते हैं. शी -मार्ट जैसे प्रावधान महिला उद्यमिता को बाजार से जोडऩे की पहल है, जबकि हर जिले में गल्र्स हॉस्टल का प्रस्ताव शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आधार तैयार करेगा. आर्थिक रूप से महिला श्रम भागीदारी बढऩा दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है.
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 आर्थिक स्थिरता, संरचनात्मक सुधार और भविष्य की तकनीक के बीच संतुलन साधने वाला दस्तावेज है. यह बजट मध्यम वर्ग को स्थिरता का भरोसा देता है, उद्योग को निवेश का संकेत देता है और युवाओं को अवसरों का आश्वासन. आर्थिक नजरिए से यह एक सकारात्मक, यथार्थवादी और विकासोन्मुख बजट कहा जा सकता है, जो भारत को अगले दशक की आर्थिक छलांग के लिए तैयार करता है.
