जबलपुर : शहर में बिजली दरों में बढ़ोतरी के लिए दायर टैरिफ़ पेटिशन के विरोध की आग सड़कों तक पहुँच गई। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में आम लोग घंटाघर चौक पर एकत्र हुए और बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिना जनता को भरोसे में लिए और बिना व्यापक सार्वजनिक जानकारी के नियामक आयोग द्वारा याचिका स्वीकार करना पारदर्शिता के खिलाफ है।
मंच के पीजी नजपाण्डे ने कहा कि बिजली कंपनियाँ लगातार घाटे का हवाला देकर दरें बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। मंच की दलील है कि जीएसटी घटने के बाद कोयले के दाम लगभग 400 रुपये प्रति टन कम हुए हैं, ऐसे में महंगी बिजली उत्पादन का तर्क सही नहीं ठहरता। उनका कहना है कि जब उत्पादन लागत कम हो रही है, तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने का कोई औचित्य नहीं।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर लेकर नारे लगाए, महंगी बिजली नहीं चलेगी जनता पर बोझ बंद करो टैरिफ़ पेटिशन वापस लो मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं का कहना था कि घरेलू खर्च पहले ही महंगाई की मार झेल रहा है, ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी आम आदमी की परेशानी और बढ़ा देगी। मंच ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश की जनता सस्ती और न्यायपूर्ण दरों पर बिजली पाने की हकदार है। लेकिन बिजली कंपनियाँ अपनी वित्तीय अनियमितताओं और प्रबंधन की कमजोरियों का बोझ जनता पर डालना चाहती हैं। उपभोक्ताओं ने नियामक आयोग से मांग की कि दर वृद्धि प्रस्ताव को तत्काल खारिज किया जाए और पारदर्शी जनसुनवाई आयोजित की जाए।
