जर्जर स्टॉप डैम से जलसंकट, टैंकर के पानी से कर रहे तर्पण

ब्यावरा। वर्ष 2007 में नगर में भयावह बाढ़ आई थी. बाढ़ की विभिषिका में स्थानीय कॉलेज के पीछे अजनार नदी पर स्थित स्टॉप डेम का एक छोर बह गया था. डेम के क्षतिग्रस्त होने से यहां पानी नहीं रुक पाया. डेढ़ दशक से अधिक समय बाद भी डेम जस की तस अवस्था में है.

गौरतलब है कि 7 जुलाई वर्ष 2007 में नगर में भारी बारिश के चलते बाढ़ आ गई थी. जिसमें काफी नुकसान हुआ था. बाढ़ के तेज प्रवाह से कॉलेज के पीछे रपटे के समीप मौजूद स्टॉप डेम का एक हिस्सा पानी में बह गया था. इसके बाद से डेम में बारिश का पानी नहीं रुक पाया.

रामलीला घाट तक रहता पानी

डेम के क्षतिग्रस्त नहीं होने के पूर्व डेम को रोकने पर नदी क्षेत्र में पानी की काफी उपलब्धता बनी रहती थी. यहां पानी रोकने पर रामलीला घाट तक काफी मात्रा में पानी बना रहता था. यही कारण है कि पितृपक्ष के दौरान घाट पर ही तर्पण का कार्य सुचारु हो जाता था. लेकिन जब से घाट क्षेत्र में पानी की कमी होने लगी तो मजबूरन घाट के ऊपर टेंकर के पानी से तर्पण कार्य शुरु किया गया. हांलाकि वर्षो बाद अभी तक बारिश का दौर चलने के कारण घाट क्षेत्र में पानी की उपलब्धता के चलते घाट पर ही तर्पण कार्य कराया जा रहा है किंतु आगामी दिनों में यदि घाट क्षेत्र में पानी कम हुआ तो फिर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

जल स्तर में होगी बढ़ोत्तरी

कॉलेज के पीछे क्षतिग्रस्त स्टॉप डेम को यदि दुरस्त कर उसमें पानी रोका जाये तो इससे नदी के आसपास क्षेत्र में जल स्तर में भी बढ़ोत्तरी होगी और आसपास मौजूद ट्यूबवेल, कुएं, हेण्डपम्पों का जल स्तर बढ़ेगा तथा गर्मी के दिनों में पेयजल की उपलब्धता के रुप में इसका फायदा मिल सकेगा.

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