जबलपुर आगमन पर वॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता डॉ. गोविंद नामदेव से नवभारत की विशेष बातचीत
जबलपुर: हिंदी सिनेमा और रंगमंच की दुनिया में अपनी दमदार खलनायक व चरित्र भूमिकाओं से अलग पहचान बनाने वाले प्रख्यात अभिनेता डॉ. गोविंद नामदेव जबलपुर प्रवास पर रहे। इस दौरान नवभारत के पत्रकार अमन पटेल से उन्होंने अपने जीवन, अभिनय यात्रा, उपलब्धियों और आगामी फिल्मों को लेकर खुलकर बातचीत की। अभिनेता डॉ गोविंद नामदेव ने जबलपुर को लेकर चर्चा में कहा कि जबलपुर एक बेहद खूबसूरत शहर है, यहां फिल्मों की शूटिंग हो ऐसा मैं भी चाहता हूं, इसके लिए मैंने कई डायरेक्टर और प्रड्यूसर को भी कहा है कि वे जबलपुर में आएं शहर में घूमें, यहां कई जगहों पर शूटिंग के लिए अच्छी लोकेशन हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में किसी फिल्म की शूटिंग जबलपुर में होने का प्लान हुआ था लेकिन वह किसी कारणवश जबलपुर में ना होकर महेश्वर में शूट हो रही है।
सागर से एनएसडी तक का सफर
डॉ. गोविंद नामदेव का जन्म 3 सितंबर 1954 को सागर, मध्यप्रदेश में हुआ। उन्होंने बताया कि 15 वर्ष की उम्र तक सागर में रहकर प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। आठवीं कक्षा के बाद वे दिल्ली चले गए, जहाँ उन्होंने अभिनय को ही अपना लक्ष्य बना लिया। दिल्ली में उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में प्रवेश लिया और 1978 में स्नातक हुए। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी ग्रेजुएशन पूरा किया। एनएसडी से पढ़ाई के बाद वे एनएसडी रिपर्टरी कंपनी से जुड़े और करीब 11 वर्षों तक रंगमंच के जरिए अपने अभिनय को निखारते रहे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व
डॉ. नामदेव ने बताया कि रंगमंच के दौरान उन्हें विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल में प्रसिद्ध नाटक ‘अंधायुग’ में मुख्य भूमिका निभाई और वहां अपनी सशक्त प्रस्तुति से हिंदुस्तान का नाम रोशन किया।
‘शोला और शबनम’ से फिल्मों में एंट्री
फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने 1992 में डेविड धवन की फिल्म ‘शोला और शबनम’ से की, जिसमें उन्होंने एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई। इसके बाद केतन मेहता की फिल्म ‘सरदार पटेल’ में काम किया। वर्ष 1998 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’ में भ्रष्ट नेता ठाकुरदास झावले के किरदार ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ खलनायक का नामांकन भी मिला।
200 से अधिक फिल्मों का सफर
डॉ. गोविंद नामदेव अब तक लगभग 200 फिल्मों में काम कर चुके हैं। उनकी प्रमुख फिल्मों में बैंडिट क्वीन, विरासत, सरफरोश, कच्चे धागे, ओह माय गॉड, ओह माय गॉड-2 और हाल ही में रिलीज हुई ‘रेड-2’ शामिल हैं। वे मुख्य रूप से नकारात्मक और चरित्र भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उन्होंने हास्य और विविध किस्म के किरदार भी पूरी संजीदगी से निभाए हैं।
डॉक्टरेट की मानद उपाधि और सम्मान
डॉ. नामदेव ने बताया कि वर्ष 2025 में उन्हें सेज यूनिवर्सिटी द्वारा उनके असाधारण योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई, जिसके बाद उनके नाम के आगे ‘डॉ.’ जुड़ गया। इसके अलावा उन्हें “आइकन ऑफ मध्यप्रदेश” का खिताब और सागर गौरव अवॉर्ड भी प्रदान किया गया, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों मिला।
इस साल दर्शकों को मिलेंगी कई नई फिल्में
डॉ. गोविंद नामदेव ने बताया कि 2026 में उनकी लगभग 6 फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। रॉय कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म “वो लड़की है कहां”, जिसमें वे तापसी पन्नू, प्रतीक गांधी और प्रतीक बब्बर के साथ नजर आएंगे। जी स्टूडियो की फिल्म “गांधी टॉक्स”, जिसमें वे साउथ के कलाकारों के साथ दिखाई देंगे। के शेरा शेरा मल्टीप्लेक्स की फिल्म “ऑब्जेक्शन माय लॉर्ड”। नीरज व्यास निर्देशित “गौरीशंकर गौहरगंज वाले”, जिसमें वे टाइटल रोल निभा रहे हैं। राजेन्द्र लायलपुरी की फिल्म “समर्पण”, जिसमें जाकिर हुसैन भी उनके साथ हैं। इसके अलावा विनोद बच्चन की फिल्म “गिन्नी वेड्स सनी-2” में वे एक हास्य भूमिका में नजर आएंगे। इन सभी फिल्मों की रिलीज डेट जनवरी तक सामने आने की संभावना है।
अनुशासन और मेहनत ही सफलता की कुंजी
बातचीत के अंत में डॉ. गोविंद नामदेव ने युवा कलाकारों को संदेश देते हुए कहा कि “रंगमंच और सिनेमा में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और धैर्य बेहद जरूरी है। शॉर्टकट की बजाय साधना पर भरोसा करें।
