भोपाल। राजधानी की सड़कों से बीते नौ महीनों में लगभग ढाई सौ से ज्यादा सिटी बसें गायब हो गई हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिटी बसों की कमी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है। उन्हें समय पर बसें नहीं मिल रही हैं। कई बार तो उन्हें ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जो कि सिटी बस की तुलना में काफी महंगा है। विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया है, जहां बताया गया कि 25 रूटों पर चलने वाली 368 बसों में से अब केवल 11 रूटों पर 118 बसें ही चल रही हैं। इधर,बस ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें पिछला बकाया भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण बीसीएलएल कंपनी को भारी नुक्सान हुआ है.इस कारण वे बसों का संचालन नहीं कर पा रहे हैं। सिटी बसों के न चलने से राजधानी भोपाल में डेढ़ हजार नए आटो चलने लगे हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं किराया भी दो से तीन गुना अधिक देना पड़ रहा है और दुर्घटना का भी डर बना रहता है । नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने अधिकारियों से कहा है कि निगम स्वयं ही ड्रायवर कंडेक्टरों को कांट्रेक्ट के आधार पर बसों को संचालन कराए। इससे रोजाना ही आय व्यय की जानकारी मिलेगी और बसों का संचालन सही तरीके से हो सकेगा।
सड़कों से 250 बसें गायब, डेढ़ हजार आटो बढे इससे बिगड़ा ट्रैफिक
