बुधवार को विश्व बाघ दिवस मनाया गया. मध्य प्रदेश के लिए इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि हमारा प्रदेश टाइगर स्टेट कहलाता है. ‘टाइगर स्टेट’ होना केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक पहचान और वैश्विक पहचान भी है. वर्ष 2022 की बाघ गणना में 785 बाघों के साथ देश में पहला स्थान हासिल करने वाला मध्य प्रदेश अब एक रिपोर्ट के अनुसार 2026 की गणना में लगभग 1100 बाघों के आंकड़े तक पहुंच सकता है. यदि ऐसा होता है तो यह लगभग 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि होगी. यह सफलता बताती है कि पिछले वर्षों में संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और वन विभाग के प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं. लेकिन यह उपलब्धि अपने साथ नई और बड़ी जिम्मेदारियां भी लेकर आई है.
बाघों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के जंगलों में उनका प्रजनन बेहतर हुआ है. अब स्थिति यह है कि टाइगर रिजर्व की सीमाएं उनके लिए छोटी पडऩे लगी हैं. युवा बाघ नए इलाकों की तलाश में भोपाल, रायसेन, देवास जैसे वन मंडलों तक पहुंच रहे हैं, जहां कभी उनकी स्थायी मौजूदगी नहीं थी. यह प्रकृति का स्वाभाविक व्यवहार है, लेकिन इसके कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ रही है. इसलिए अब केवल बाघों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और विस्तृत आवास उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है.
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में वन्य पर्यटन का योगदान लगातार बढ़ रहा है. कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय-डुबरी जैसे टाइगर रिजर्व देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं को भी गति मिलती है. पर्यटन की इस पूरी श्रृंखला का सबसे बड़ा आकर्षण बाघ ही हैं. इसलिए बाघों का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और ग्रामीण आजीविका से भी जुड़ा हुआ है.
सरकार को अब अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा. जंगलों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर सुरक्षित रखना, बफर क्षेत्रों को मजबूत बनाना, अतिक्रमण रोकना और विकास परियोजनाओं में वन्यजीवों की आवाजाही का विशेष ध्यान रखना समय की मांग है. यदि जंगल आपस में जुड़े रहेंगे तो बाघ सुरक्षित रूप से नए क्षेत्रों में पहुंच सकेंगे और मानव बस्तियों में उनके प्रवेश की घटनाएं भी कम होंगी. इसके साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें संरक्षण का भागीदार बनाना भी उतना ही आवश्यक है.
मध्य प्रदेश ने टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है. अब अगला लक्ष्य केवल ‘सबसे ज्यादा बाघ’ होना नहीं, बल्कि ‘सबसे सुरक्षित बाघ आवास’ बनना होना चाहिए. टाइगर स्टेट की पहचान तभी सार्थक होगी, जब हर बाघ को सुरक्षित जंगल, पर्याप्त क्षेत्र और निर्बाध प्राकृतिक मार्ग मिल सके. यही प्रदेश की जैव विविधता की रक्षा करेगा, पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और आने वाली पीढिय़ों के लिए मध्य प्रदेश की इस अनमोल धरोहर को सुरक्षित रखेगा.दरअसल, बाघ मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी यूएसपी हैं. इसलिए उनकी सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना ही चाहिए.
