जन्माष्टमी के व्रत और पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए? यहां जानिए।
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और साथ में व्रत भी रखते हैं। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करता है, उसे उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
जन्माष्टमी के व्रत और पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए? यहां जानिए।
जन्माष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
प्याज-लहसुन, मांसाहार भोजन न करें
धर्म शास्त्रों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन व्रती को प्याज-लहसुन, मांसाहार भोजन नहीं करना चाहिए। बल्कि फलाहार या सात्विक भोजन करें।
गुस्सा और लड़ाई झगड़ा न करें
जन्माष्टमी के दिन खान पान के अलावा गुस्सा और लड़ाई झगड़ा करने से बचना चाहिए।
इस दिन घर में शांत माहौल बनाए रखना चाहिए। इस दिन भगवान कृष्ण का ध्यान और भजन-कीर्तन कर मन को शांत रखने का प्रयास करना चाहिए।
जीव जंतु को परेशान न करें
इस दिन जीव जंतु को परेशान करने से बचना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का गायों से विशेष संबंध माना जाता है। उन्हें गोपाल के नाम से भी जाना जाता है । इसलिए जन्माष्टमी के दिन गायों और अन्य पशु-पक्षियों को परेशान या नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। संभव हो तो उन्हें भोजन या चारा खिलाएं।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। बिना तुलसी दल के भगवान को भोग न लगाएं।
जन्माष्टमी पर इस विधि से रखें व्रत
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण या लड्डू गोपाल के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय हाथ में तुलसी दल रखकर भगवान से व्रत को श्रद्धापूर्वक पूरा करने की प्रार्थना करने की परंपरा है। साथ ही जाने-अनजाने में होने वाली भूल के लिए भगवान से क्षमा मांग सकते हैं।
