विजय शर्मा भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की कार्रवाई से बढ़े दबाव के बीच भोपाल के मास्टर प्लान को लागू करने की कवायद फिर तेज हो गई है. राजधानी में चर्चा है कि सरकार जन्माष्टमी के बाद वर्ष 2020 में तैयार किए गए वर्ष 2031 के मास्टर प्लान को लागू करने पर फैसला ले सकती है. हालांकि, यदि सरकार भोपाल के भविष्य के विकास को 2047 की योजना से जोड़कर नया मास्टर प्लान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसमें करीब छह माह का अतिरिक्त समय लग सकता है. मौजूदा मास्टर प्लान लागू होने की स्थिति में राजधानी से जुड़े करीब 254 गांवों के विकास और भूमि उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का रास्ता खुल सकता है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल की आवासीय कॉलोनियों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई शुरू होने से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ी है. कार्रवाई के विरोध में शहर के विभिन्न व्यापारी संगठन एकजुट हो गए हैं. व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए और राजधानी का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए. हालांकि मास्टर प्लान लागू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई ने इस मांग को और तेज कर दिया है.
व्यापारी संगठनों के साथ जनप्रतिनिधियों का दबाव
मास्टर प्लान को लेकर अब व्यापारी संगठनों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेता भी राजधानी की मौजूदा स्थिति का समाधान मास्टर प्लान लागू करने में देख रहे हैं. व्यापारियों का बड़ा वर्ग राजधानी में सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार माना जाता है. ऐसे में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई और उससे पैदा हुए असंतोष के बीच मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग ने सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा दिया है.
दो विकल्पों पर चर्चा:
सरकार के सामने फिलहाल दो विकल्पों को लेकर चर्चा है. पहला, वर्ष 2020 में तैयार वर्ष 2031 के मास्टर प्लान को ही लागू किया जाए, जिससे प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्द पूरी हो सकती है. दूसरा, भोपाल के विकास को वर्ष 2047 की दीर्घकालिक विकास योजना के अनुरूप रखते हुए मास्टर प्लान में नए सिरे से बदलाव किए जाएं. दूसरे विकल्प में प्रक्रिया पूरी करने में करीब छह माह लगने की संभावना जताई जा रही है.
254 गांवों के लिए अहम होगा फैसला:
मास्टर प्लान लागू होने का असर सिर्फ शहर की कॉलोनियों और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा. राजधानी से जुड़े करीब 254 गांवों में भूमि उपयोग, विकास और भविष्य की अधोसंरचना को लेकर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा. यही वजह है कि लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को अब राजधानी के नियोजित विस्तार और विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
