
उज्जैन। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उज्जैन उत्तर से छह बार विधायक रहे पारस जैन के निधन से प्रदेश की राजनीति ही नहीं, सामाजिक और खेल जगत ने भी अपना एक समर्पित व्यक्तित्व खो दिया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे पारस जैन का इंदौर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। भले ही बीते विधानसभा में उनका टिकट कट गया बावजूद पहलवान नहीं कटे, समाज से, राजनीति से अंतिम सांस तक जुड़े रहे। उनके निधन का समाचार मिलते ही उज्जैन सहित पूरे मध्य प्रदेश में शोक की लहर फैल गई। भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग और उनके शुभचिंतकों का उनके निवास पर तांता लग गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन पहुंचे और अंतिम यात्रा से पूर्व पार्थिव देह पर भारतीय जनता पार्टी का ध्वज ओढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा पारस जैन के पुत्र का हौसला बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारस जैन का सार्वजनिक जीवन संगठन के प्रति समर्पण, सादगी और सेवा का प्रतीक था। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
सोमवार को दोपहर बाद उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अंतिम यात्रा चक्रतीर्थ मुक्तिधाम पहुंची, जहां पूरे राजकीय एवं सामाजिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा के वरिष्ठ नेता सहित जनप्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।
जनता की आवाज बने जैन
पारस जैन का राजनीतिक सफर उज्जैन की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। वे उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक चुने गए और वर्षों तक जनता की आवाज बनकर विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। मध्य प्रदेश सरकार में उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी निभाई। अपने कार्यकाल में उन्होंने वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों का दायित्व संभाला। बाद में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। प्रशासनिक अनुभव, सरल कार्यशैली और जनता से निरंतर संवाद उनकी पहचान बन गया था। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन उन्होंने इसे कभी व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाया। वे अंतिम समय तक भाजपा सहित सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होते रहे।
