नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग ने पश्चिम एशिया संकट के बीच कमजोर मानसून और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के पर चिंता व्यक्त की है।
विभाग की ओर से मंगलवार को जारी जून की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि देश की अर्थव्यवस्था मजूबत है और पश्चिम एशिया संकट के बीच भी अधिकतर आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं, हालांकि कुछ संकेतकों में हल्की कमजोरी देखी गयी।
इसमें कहा गया है, “जलाशयों के अच्छे स्तर और पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता के कारण कृषि गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां जारी हैं , हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर प्रगति ने खरीफ बुवाई पर दबाव डाला है और मानसूनी बारिश की कमी चिंता का विषय है। आने वाले वर्षों में जिन कई चीजों के लिए भारत को बफर (सुरक्षा कवच) बनाने की आवश्यकता है, उनमें पानी संभवतः सबसे ऊपर होगा।”
समीक्षा में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तनाव में उल्लेखनीय कमी देखी गयी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत, जो अप्रैल में 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी थी, जून में घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गयी है। इसके बावजूद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों के आवागमन में जारी बाधा और क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता यह दर्शाती है कि तेल की कीमतों में हालिया सुधार और व्यापक बाजार धारणा अब भी भंगुर है।
उल्लेखनीय है कि कच्चा तेल अब लगभग पश्चिम एशिया संकट से पहले के स्तर पर आ चुका है। आज ब्रेंट क्रूड वायदा 73 डॉलर प्रति बैरल पर है।
विभाग ने कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया सुधार के बावजूद, वैश्विक ऊर्जा बाजारों की कमजोरियां समाप्त नहीं हुई हैं। तेल उत्पादन में अधिक लंबे समय तक बाधा रहने का अनुमान है। वैश्विक कच्चे तेल के भंडार निकट भविष्य में दबाव में बने रहने की संभावना है।
