राखी गुलजार की जिंदगी में आई आंधी ने बदली पूरी कहानी, सालों बाद सामने आईं तो बदला अंदाज देख चौंके फैंस

मुंबई, स्वतंत्रता दिवस के दिन जन्मीं फेमस एक्ट्रेस राखी गुलजार ने अपने बेजोड़ एक्टिंग से लाखों दिल जीते। हालांकि, उनकी पर्सनल लाइफ और रिश्तों की उलझनों ने उनकी जीवनधारा बदल दी।

भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें कुछ चेहरे ऐसे होंगे जिनकी उदास आंखें और सहज मुस्कान बिना किसी संवाद के पूरी दास्तान कह देती हैं। 70 के दशक से लेकर 90 के दशक तक बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली दिग्गज एक्ट्रेस राखी गुलजार ऐसी ही फनकार हैं।

15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के दिन पर जन्मीं राखी ने अपने 4 दशक लंबे फिल्मी सफर में हर पीढ़ी के दर्शकों को अपना दीवाना बनाया। उन्होंने पर्दे पर जहां एक ओर भावुक प्रेमिका और पत्नी के यादगार रोल निभाए, वहीं दूसरी ओर स्वाभिमानी मां के रूप में भी गहरी छाप छोड़ी। पर्दे पर सफलता की बुलंदियों को छूने वाली इस एक्ट्रेस का व्यक्तिगत जीवन कई अप्रत्याशित मोड़ों से होकर गुजरा।

महज 20 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में पहला कदम
राखी का शुरुआती जीवन मुश्किलों से घिरा रहा और उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही जीवन के कड़वे सच का सामना करना पड़ा। महज 16 साल की उम्र में उनकी पहली शादी हुई थी, लेकिन यह रिश्ता 2 साल से ज्यादा नहीं चल सका और दोनों अलग हो गए। इस अलगाव के बाद भी उन्होंने अपने कदमों को डगमगाने नहीं दिया और कला के क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाई।

साल 1967 में आई बंगाली फिल्म बंधु वरण से उनकी एक्टिंग सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 1970 में रिलीज हुई फिल्म जीवन मृत्यु से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म में धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और वह रातों-रात बड़ी अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं।

गुलजार के साथ प्यार और रिश्तों में आई अनचाही दरार
सिनेमा की दुनिया में सफलता हासिल करने के दौरान ही उनकी मुलाकात फेमस गीतकार और फिल्म डायरेक्टर गुलजार से हुई। दोनों का यह परिचय जल्द ही मोहब्बत में बदल गया और साल 1973 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए। इस शादी से उनकी एक बेटी मेघना गुलजार हैं, जो वर्तमान में हिंदी सिनेमा की जानी-मानी डायरेक्टर हैं।

हालांकि, शादी के बाद दोनों के रिश्तों में वैचारिक मतभेद उभरने लगे। कहा जाता है कि शादी के समय उनको एक्टिंग न करने को लेकर सहमति बनी थी, पर बाद में उन्होंने दोबारा फिल्मों की रुख किया। काम और निजी जिंदगी के इन्हीं मतभेदों के कारण दोनों ने अलग रहने का फैसला किया। उन्होंने कभी कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया, लेकिन वे दशकों से एक-दूसरे से अलग जिंदगी बीता रहे हैं।

कभी कभी से लेकर करण अर्जुन तक का स्वर्णिम दौर
रिश्तों के तमाम झंझावातों के बाद भी राखी गुलजार ने अपनी एक्टिंग जर्नी को थमने नहीं दिया। उन्होंने शशी कपूर, अमिताभ बच्चन और संजीव कुमार जैसे दिग्गजों के साथ एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं।

कभी कभी, दूसरा आदमी, तपस्या, कसमें वादे, त्रिशूल और काला पत्थर जैसी रचनाओं ने उन्हें हिंदी सिनेमा के शिखर पर स्थापित कर दिया।

समय बीतने के साथ जब अहम भूमिकाएं बदलीं, तो उन्होंने सहजता से मां और चरित्र भूमिकाओं को स्वीकार किया। अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ की राम लखन, शाहरुख खान की बाजीगर और शाहरुख खान और सलमान खान करण अर्जुन जैसी फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए मां के रोल आज भी भारतीय दर्शकों के मन पर ताजा हैं।

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