उज्जैन में शाही मस्जिद के सडक़ चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने के दौरान हुआ विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रशासन और मस्जिद इंतजामिया के बीच सहमति बनने के बाद जब कार्रवाई शुरू हुई, तब भीड़ का जुटना, पुलिस पर पथराव और उसके बाद लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल बताता है कि मामूली विवाद को भी किस तरह तनाव में बदला जा सकता है. इससे भी गंभीर बात यह है कि घटना के दौरान अफवाहों और सोशल मीडिया पर प्रसारित गलत सूचनाओं ने माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की.
उज्जैन केवल धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच लंबे समय से कायम सामाजिक सद्भाव की भी पहचान है. सिंहस्थ जैसे विराट आयोजन की तैयारियों के बीच शहर में शांति और सौहार्द का वातावरण बना रहना और भी जरूरी है. सडक़ चौड़ीकरण अथवा किसी निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति है तो उसके लिए न्यायिक और लोकतांत्रिक रास्ते खुले हैं. कानून को अपने हाथ में लेकर भीड़ के रूप में विरोध करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं हो सकता.पुलिस पर पथराव, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाडऩे और हिंसा फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. कार्रवाई करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए और किसी समुदाय विशेष को सामूहिक रूप से जिम्मेदार न ठहराया जाए. कानून की नजर में दोष व्यक्ति का होना चाहिए, उसकी पहचान या समुदाय का नहीं.
इस पूरे घटनाक्रम का एक और चिंताजनक पहलू सोशल मीडिया है. आज किसी घटना की पूरी जानकारी सामने आने से पहले ही उसके बारे में आधी-अधूरी, भ्रामक अथवा जानबूझकर गलत बातें तेजी से प्रसारित होने लगती हैं. उज्जैन की घटना ने फिर दिखाया है कि लोग सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी संदेश को कितनी जल्दी सच मान लेते हैं. ऐसी स्थिति में अफवाह एक छोटी चिंगारी की तरह होती है, जो कुछ ही समय में बड़े विवाद का रूप ले सकती है.इसलिए प्रशासन को सोशल मीडिया पर भ्रामक और उकसाने वाली पोस्ट करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही नागरिकों को भी किसी अपुष्ट संदेश, वीडियो या पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता जांचनी चाहिए. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ समाज में तनाव और हिंसा पैदा करने वाली गलत सूचना फैलाने की स्वतंत्रता नहीं हो सकता.
उज्जैन में प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से समाधान का रास्ता निकलना सकारात्मक बात है. अब आवश्यकता इस बात की है कि सभी पक्ष इस सहमति का सम्मान करें और शहर को फिर सामान्य स्थिति में लौटने दें. पुलिस-प्रशासन को भी स्थिति पर सतत नजर रखनी होगी, ताकि किसी नई अफवाह या उकसावे से तनाव दोबारा न बढ़े.
उज्जैन की पहचान उसकी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता से भी है. इस विरासत को सुरक्षित रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, हर नागरिक का दायित्व है. विवाद आते-जाते रहेंगे, लेकिन शहर का सद्भाव कायम रहना चाहिए. यही उज्जैन की सबसे बड़ी ताकत है और इसे किसी भी अफवाह, उपद्रव या राजनीतिक-सामाजिक उकसावे की भेंट नहीं चढऩे दिया जाना चाहिए.
