जबलपुर: बेलगाम रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी के चलते शहर की सडक़े लाल हो रही है। अगर आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो जनवरी से अगस्त 2026 तक बड़े छोटे वाहन से 1423 दुर्घटना जिले में हुई है, इसमें से 179 व्यक्तियों की मौतें हुई है। मृतकों में 90 व्यक्ति ऐसे थे जिनके पास हेलमेट नहीं था। हेलमेट है जरूर का संदेश देने और सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ विद्यार्थियों को नशे की गतिविधियों से दूर रखने के लिए जिले के स्कूल-कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मंगलवार को कलेक्टर सभागार में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सडक़ सुरक्षा को लेकर सम्बंधित विभागों की बैठक हुई।
कलेक्टर सिंह ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है। खासतौर पर दोपहिया वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने के लिए लगातार समझाइश दी जाए। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में सडक़ सुरक्षा से जुड़ी शॉर्ट फिल्म और वीडियो दिखाए जाएं। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के तहत भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विद्यार्थियों से अपने साथियों और परिवार के सदस्यों को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने को कहा जाएगा। बैठक में स्कूलों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और अन्य गतिविधियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
स्पीड कंट्रोल करने रम्बल रिस्ट्रप लगाएं
कलेक्टर सिंह ने एमपीआरडीसी के अधिकारियोंं से कहा कि जितने भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे, वहां स्पीड कण्ट्रोल करने के लिए रम्बल स्ट्रिप लगाएं, साथ ही कहा कि जहां आवश्यकता हो वहां सीमेंट के ब्रेकर भी बना सकते है। उन्होंने कहा कि जबलपुर पाटन रोड पर पर्याप्त ब्रेकर बनाए ताकि दुर्घटना पर कण्ट्रोल किया जा सके।
कार्रवाई से पहले बच्चे की परिस्थिति समझें
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने बैठक में कहा कि विद्यार्थियों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन का सक्रिय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसकी परिस्थितियों और समस्याओं को समझना चाहिए। उद्देश्य बच्चे को पकडऩा, डांटना या दंडित करना नहीं, बल्कि उसे नशे की आदत से बाहर निकालना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी पारिवारिक या अन्य परिस्थितियों के कारण दोपहिया वाहन से स्कूल आते हैं। ऐसे में सडक़ सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार समझाइश देने के साथ नोटिस और अन्य औपचारिक प्रक्रिया भी अपनाई जाए, ताकि इसकी जानकारी अभिभावकों तक पहुंच सके। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को पत्र भी जारी किया जाएगा।
विद्यालय के लिए एक मॉडल तैयार होगा
पुलिस अधीक्षक उपाध्याय ने कहा कि नशे से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत स्कूल स्तर पर ही रोकने की जरूरत है। विशेष रूप से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों पर ध्यान दिया जाए। इस उम्र में गलत संगत और नशे जैसी आदतों का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय के लिए एक मॉडल तैयार कर जानकारी दी जाएगी। किसी विद्यार्थी में नशे से जुड़ी समस्या दिखाई देने पर पहले उसे समझाने और काउंसलिंग का प्रयास किया जाए।
