पाकिस्तान में जन्मे सुरों के सरताज बने भारत की शान, अदनान सामी ने ऐसे बदली अपनी पहचान

मुंबई, सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दीवाना बनाने वाले सिंगर अदनान सामी का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जानिए कैसे पाकिस्तानी नागरिकता छोड़कर उन्होंने भारत में अपना आशियाना बनाया।

संगीत की दुनिया में अपनी अनोखी आवाज और धुनों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गायक अदनान सामी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 15 अगस्त 1971 को पाकिस्तान के लाहौर शहर में जन्मे अदनान ने अपनी संगीत यात्रा से हमेशा सीमाओं को पार किया है।

उनके पिता अरशद सामी एक पाकिस्तानी राजनयिक थे, जिसकी वजह से उनके शुरुआती जीवन को एक अलग पहचान मिली। हालांकि, अपनी काबिलियत के दम पर उन्होंने भारत में वो प्यार और सम्मान हासिल किया, जिसका सपना हर कलाकार देखता है। साल 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले अदनान सामी की लाइफ जर्नी बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरी रही है।

डेढ़ दशक तक चला नागरिकता पाने का लंबा संघर्ष
भारत को अपना घर बनाने का सपना देखने वाले सिंगर अदनान सामी के लिए यह रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं थी। उन्होंने साल 2001 में ही पाकिस्तान छोड़कर भारत में स्थायी रूप से रहना शुरू कर दिया था। हालांकि, कानून और प्रक्रियाओं के चलते उन्हें भारतीय पासपोर्ट पाने के लिए करीब 16 लंबे सालों का इंतजार करना पड़ा। इस कठिन दौर के दौरान उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उनका हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ा।

पड़ोसी मुल्क से मिलीं नफरत और जानलेवा धमकियां
भारत की नागरिकता अपनाने के फैसले के बाद अदनान सामी को पड़ोसी देश यानी पाकिस्तान में भारी विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। वहां के कई कट्टरपंथी तबकों ने उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर निशाना बनाया और उनके खिलाफ नफरत फैलाई।

इतना ही नहीं, उन्हें जान से मारने की धमकियां तक दी गईं। इसके बाद भी सिंगर सामी ने कभी अपनी आवाज दबाने नहीं दी। उन्होंने साफ किया कि उनकी किसी सामान्य नागरिक से कोई दुश्मनी नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी वहां के उन जिम्मेदार अधिकारियों से है जिन्होंने उनके साथ अन्यायपूर्ण रवैया अपनाया।

नफरत का जवाब और भारतीय प्यार का सच्चा अहसास
अपनी बात को पूरी बेबाकी के साथ रखने के लिए पहचाने जाने वाले सिंगर अदनान सामी ने ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि जब भी वह वहां की सच्चाई बयान करने बैठेंगे, तो कई चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।

भारत में मिले बेहद प्यार और सम्मान के प्रति वह हमेशा अपनी कृतज्ञता जाहिर की। अदनान सामी का मानना है कि भारत के लोगों ने उन्हें एक कलाकार के रूप में अपनाया और वह हर स्थिति में अपनी इस नई पहचान और देश की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पद्मश्री सम्मान और भारतीय संगीत में अमर योगदान
संगीत के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान भी दिया। पियानो वादन में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले सामी ने हिंदी फिल्मों को एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए हैं।

अभिनेता गोविंदा के साथ फिल्माया गया ‘लिफ्ट करा दे’ गाना और ‘कभी तो नजर मिलाओ’ जैसे गानों ने उन्हें हर घर में पॉपुलर बना दिया। आज वे गर्व से भारतीय नागरिक के रूप में दुनियाभर में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

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