दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को पाँच साल के लिए गोद ले सकेंगी निजी कंपनियां : रेखा गुप्ता

नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ को कैबिनेट से मंजूरी मिल गयी है जिसके बाद निजी कंपनियां दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को पांच साल के लिए गोद ले सकेंगी।

श्रीमती गुप्ता ने आज कहा कि दिल्ली सरकार ‘हमारे स्मारक, हमारा गौरव’ योजना के अंतर्गत ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ शुरू कर रही है, ताकि अधिक से अधिक संस्थाएं और नागरिक इस अभियान का हिस्सा बन सकें। दिल्ली सरकार का पुरातत्व विभाग ‘दिल्ली प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 2004’ के अंतर्गत दिल्ली के स्थानीय महत्व वाले उन ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और विकास का दायित्व निभाता है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इन स्मारकों को बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना, उनके आसपास आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनका व्यवस्थित रखरखाव सुनिश्चित करना और उन्हें पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक एवं सुविधाजनक बनाना दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ के अंतर्गत सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), निजी कंपनियां, पंजीकृत एनजीओ, ट्रस्ट, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से दिल्ली सरकार के ऐतिहासिक स्मारकों को गोद ले सकेंगे। ऐसे सहयोगी ‘स्मारक मित्र’ कहलायेंगे। वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में 75 ऐतिहासिक स्मारक हैं। इस योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ संबंधित स्मारक पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड जैसी पर्यटक सुविधाओं के विकास, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च स्वयं वहन करेंगे। इसके तहत प्रत्येक गोद लिए गए स्मारक पर दिल्ली सरकार को औसतन लगभग 4.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर स्मारक मित्र किसी स्वीकृत कार्यक्रम या आयोजन से कोई आय अर्जित करते हैं तो उस राशि का उपयोग केवल संबंधित स्मारक के रखरखाव और विकास पर ही किया जायेगा। उस आय को निजी लाभ के रूप में अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी। स्मारक अभिग्रहण की अवधि पांच वर्ष होगी। इसके लिए दिल्ली सरकार, संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी और स्मारक मित्र के बीच त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया जायेगा।

श्रीमती गुप्ता ने कहा कि इन दोनों योजनाओं से कुशल, अर्धकुशल और पेशेवर रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उन्हें जनभागीदारी के माध्यम से जीवंत सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है। दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत हमारी पहचान और हमारी सामूहिक धरोहर है। सरकार समाज की भागीदारी के साथ इन स्मारकों को सुरक्षित, संरक्षित और विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 

 

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