तेहरान, (वार्ता) ओमान और संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाए गए एक नए समुद्री मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य होकर गुजरने वाले जहाजों की संख्या में बुधवार के रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले गिरावट देखी गई है, लेकिन इसके बावजूद इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगातार जारी है। ईरान ने इस नए मार्ग पर आपत्ति जताई है क्योंकि इस संबंध में हुई चर्चाओं में उसे शामिल नहीं किया गया था।
समुद्री डेटा प्लेटफॉर्म ‘केपलर’ के अनुसार गुरुवार को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से कम से कम 42 वाणिज्यिक जहाज गुजरे, जबकि बुधवार को यह संख्या 57 दर्ज की गई थी। इन जहाजों में तेल टैंकर, एलपीजी ले जाने वाले जहाज और उर्वरक से लदे जहाज शामिल थे।
इन 42 जहाजों में से 10 जहाजों ने फारस की खाड़ी में प्रवेश किया जबकि 32 जहाज वहां से बाहर निकले। विशेष बात यह है कि इनमें से लगभग आधे जहाजों ने ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों के बजाय ओमान के तट के करीब से गुजरने वाले दक्षिणी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया।
जहाजों की यह आवाजाही शुक्रवार को भी जारी रही और केपलर के आंकड़ों के अनुसार दोपहर तक 29 वाणिज्यिक जहाज जलडमरूमध्य को पार कर चुके थे। इनमें से 10 जहाजों ने खाड़ी में प्रवेश किया और 19 बाहर निकले, जबकि इनमें से 17 जहाजों ने ओमानी मार्ग का इस्तेमाल किया।
इस मार्ग का लगातार इस्तेमाल सुरक्षा चिंताओं के बावजूद देखा जा रहा है। ब्रिटेन के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस’ (यूकेएमटीओ) केंद्र के अनुसार, गुरुवार को इस दक्षिणी मार्ग से गुजरते समय सिंगापुर के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला होने की खबर मिली थी।
‘मैरीनट्रैफिक’ के आंकड़ों से पता चलता है कि हमले की इस कथित घटना (भारतीय समयानुसार शाम लगभग 7:40 बजे) से लेकर गुरुवार आधी रात के बीच लगभग 15 टैंकर और मालवाहक जहाज इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरे।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस वैकल्पिक मार्ग का कड़ा विरोध किया है। उसका कहना है कि ओमान और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने ईरान से बिना कोई सलाह किए इस रास्ते की घोषणा की है। आईआरजीसी ने जहाजों का संचालन करने वाली कंपनियों को इस रास्ते का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है।
एक बयान जारी करते हुए आईआरजीसी ने साफ किया कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए केवल उन्हीं रास्तों को मंजूरी दी गई है, जिन्हें ईरान द्वारा तय किया गया है।’
