जबलपुर : नरवाई न जलाने की मुहिम में ग्राम मुर्रई इन दिनों पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुका है। बुधवार को अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी विकासखंड पाटन के ग्राम मुरई पहुंची जहां कृषक आदित्य पटेल गेहूं फसल के पश्चात नरवाई जलाए बिना ही सुपर सीडर से उड़द फसल की बोनी कर रहे थे। इस मौके पर आदित्य ने बताया कि उनके द्वारा 3 वर्षों से गेहूं फसल के बाद नरवाई में आग लगाने की जगह अब सुपर सीडर से बोनी ने ले ली है तथा सुपर सीडर उपयोग करने से कई लाभ भी प्राप्त हो रहे हैं।इस मौके पर डॉ. इंदिरा त्रिपाठी जी ने इस बात पर जोर दिया कि मुर्रई ग्राम उन्नत कृषि-उन्नत किसान का एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने अन्य गांवों के किसानों से भी अपील की कि वे कृषि अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाएं और खेती को आधुनिक व पर्यावरण अनुकूल बनाएं।
ये हैं विशेषताएं…
धुएँ से होने वाले वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग में कमी होती है।
— खेत की जुताई का खर्च कम होता है और सीधा बुवाई संभव है।
— फसल अवशेष खाद के रूप में मिट्टी को पोषण प्रदान करते हैं। नमी के संरक्षण के कारण बीजों का अंकुरण बेहतर होता है।
गांव में मौजूद है 14 सुपर सीडर
कृषक आदित्य के अनुसार उनके ग्राम में 14 सुपर सीडर, 12 स्ट्रॉ रीपर एवं 6 हार्वेस्टर जैसे और भी यंत्र है जो उन्हें विभागीय योजनाओं के तहत अनुदान पर प्राप्त हुए। जिस कारण से गांव के अन्य किसान भी नरवाई प्रबंधन के लिए सुपर सीडर का उपयोग कर पर्यावरण का संरक्षण तो कर ही रहे है तथा अतिरिक्त व्यय कम कर अधिक आय की और बढ़ रहे है। वहीं किसानों से परिचर्चा के दौरान डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने कृषि अभियांत्रिकी केविभागीय योजनाओं में आवेदन के लिए आवेदन प्रक्रिया समझाई एवं यंत्रों की जानकारी दी। इस निरीक्षण एवं परिचर्चा में अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी के साथ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज श्रीवास्तव , कृषि विस्तार अधिकारी देव आनंद सिंह एवं ग्रामीण किसान देवेंद्र पटेल, अविनाश पटेल, जयपाल सिंह,आशुतोष पटेल, उमेश सिंह, सत्यम पटेल, पवन पटेल, शुभम पटेल एवं सौरभ पटेल भी उपस्थित रहे।
