जबलपुर, 25 फरवरी (वार्ता) भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और वायासैट इंडिया ने ‘सैटेलाइट और सैटेलाइट तकनीक के अनुप्रयोग’ पर अपना पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारत रत्न भीम राव अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम ट्रेनिंग में प्रस्तावित दूरसंचार नवाचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (टीआईआरटीसी) के तत्वावधान में शुरू किया गया है। सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में कौशल विकास एवं उद्योग की तैयारी को बढ़ावा देने के लिए बीएसएनएल और वायासैट इंडिया ने पिछले साल गठबंधन की घोषणा की थी। प्रशिक्षण के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता बीएसएनएल के सीएमडी रॉबर्ट रवि ने की। वायासैट के अध्यक्ष (कॉमर्शियल) बेन पामर, वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा, वायासैट के उपाध्यक्ष (एडवांस्ड एनटीएन सॉल्यूशंस) संदीप मूर्ति और दूरसंचार विभाग के अन्य अधिकारी भी संचार भवन में मौजूद थे। सैटेलाइट एवं सैटेलाइट प्रौद्योगिकी के उपयोग पर यह प्रारंभिक पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और करियर के शुरुआती दौर में काम कर रहे पेशेवरों के लिए 22 घंटे का एक वर्चुअल प्रोग्राम है।
बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “नवाचार को बढ़ावा देने और देशज क्षमताओं का निर्माण करने के हमारे लक्ष्य के अनुरूप वायासैट के साथ गठबंधन के तहत हमारा प्रारंभिक पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हमें वास्तव में बहुत प्रसन्नता है। हम भविष्य में इस गठबंधन का विस्तार कर विद्यार्थियों के लिए और पाठ्यक्रम एवं सुविधाएं लाने को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं।” दूरसंचार विभाग के उपमहानिदेशक अनिल कुमार भारद्वाज ने कहा, “उपग्रह संचार मॉड्यूल, संचार प्रौद्योगिकियों और उनके उपयोग के मामलों में वैश्विक तकनीकी दिग्गजों द्वारा पहले से ही संचालित किये जा रहे प्रशिक्षणों के अतिरिक्त है। इसका उद्देश्य संचार के उन्नत क्षेत्र में अत्यधिक कुशल जनशक्ति तैयार करना और भारत को दूरसंचार डिजाइन, विकास, विनिर्माण और सेवाओं में अग्रणी बनने में मदद करना है।” वायासैट कॉमर्शियल के अध्यक्ष (कॉमर्शियल) बेन पामर ने कहा, “भविष्य के लिए तैयार सैटेलाइट संबंधी प्रतिभा की पाइपलाइन का निर्माण करना महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी डिजिटल एवं उभरती टेक्नोलॉजी की महत्वाकांक्षा को लेकर आगे बढ़ रहा है। हमारी इच्छा भविष्य में एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ भी स्थापित करने की है जहां विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा और वे उपकरण के सजीव प्रदर्शन के जरिये अपनी समझ बढ़ा सकेंगे।”

