नील नितिन मुकेश ने हीरो के तौर पर सीमित सफलता के बाद विलेन के किरदारों में खुद को स्थापित किया। वजीर, गोलमाल अगेन और साहो जैसी फिल्मों में उनके खलनायक अवतार को सराहा गया।
बॉलीवुड एक्टर नील नितिन मुकेश ने अपने करियर में जोखिम उठाकर खुद को दोबारा साबित किया। लंबे समय तक हीरो के तौर पर पहचान बनाने की कोशिश करने वाले नील को जब वैसी सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी राह बदली और विलेन के किरदारों में खुद को पूरी मजबूती से स्थापित किया। आज नील को बॉलीवुड के उन एक्टर्स में गिना जाता है, जिनका खलनायक अवतार दर्शकों के दिलों में डर और असर छोड़ जाता है।
नील नितिन मुकेश का जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। उनका ताल्लुक एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार से है। पिता नितिन मुकेश मशहूर गायक हैं और दादा मुकेश हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े गायकों में शुमार किए जाते हैं। बचपन से ही नील का झुकाव कला और सिनेमा की ओर रहा। उन्होंने महज छह साल की उम्र में फिल्म ‘विजय’ से बतौर बाल कलाकार अभिनय की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ में भी उन्होंने अभिनय किया।
