संघर्ष से सफलता तक का सफर तय करने वाली अभिनेत्री हैं नुसरत भरुचा

मुंबई, 17 मई (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरुचा ने अपनी दमदार अदाकारी, अलग किरदारों और मेहनत के दम पर बॉलीवुड में खास पहचान बनाई है।नुसरत भरुचा का जन्म 17 मई 1985 को मुंबई में एक बोहरा परिवार में हुआ है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई से पूरी की। अभिनय के प्रति रुचि होने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया में कदम रखा। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली।

नुसरत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन धारावाहिक ‘किटी पार्टी’ से की थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों की ओर रुख करते हुए फिल्म ‘जय संतोषी मां’ से बॉलीवुड में पदार्पण किया, हालांकि उन्हें वास्तविक पहचान फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया।इसके बाद नुसरत भरुचा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘आकाश वाणी’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘छलांग’, ‘अजीब दास्तान्स’, ‘जनहित में जारी’ और हॉरर फिल्म ‘छोरी’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का दम दिखाया। खास बात यह रही कि उन्होंने केवल ग्लैमरस भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक और महिला केंद्रित विषयों पर आधारित फिल्मों में भी काम किया।

हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में, जहां अभिनेत्रियों को अक्सर ग्लैमरस सपोर्टिंग रोल्स तक सीमित कर दिया जाता है, वहीं नुसरत भरुचा ने चुपचाप बॉलीवुड में अपनी एक अलग और प्रेरणादायक पहचान बनाई है। मल्टीस्टारर एंटरटेनर्स का हिस्सा बनने से लेकर पूरी फिल्म को अपने कंधों पर उठाने तक, उनका सफर धैर्य, निरंतर मेहनत और जोखिम उठाने की हिम्मत की मिसाल है।

नुसरत भरुचा ने पहली बार मेनस्ट्रीम पहचान फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से हासिल की, जहां वे व्यावसायिक रूप से सफल फ्रेंचाइज़ी का हिस्सा बनीं। हालांकि फिल्म मुख्य रूप से पुरुष दोस्ती और रिश्तों के ड्रामे पर आधारित थी, लेकिन अपनी स्क्रीन प्रेज़ेंस से नुसरत ने अलग पहचान बनाई और बॉलीवुड की भीड़ में अपने लिए जगह तैयार की। इसके बाद ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ और ‘ड्रीम गर्ल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें कमर्शियल सिनेमा में एक मजबूत जगह दिलाई।

हालांकि नुसरत ने अपने इस सफर को खास बनाया, धीरे-धीरे खुद को नए रूप में ढालकर। गौरतलब है कि उन्होंने खुद को सिर्फ रोमांटिक कॉमेडी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने ऐसे किरदार चुने, जिनमें कहानी और भावनात्मक गहराई हो। ऐसे समय में जब कई कलाकार सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे थे, नुसरत ने महिला-केंद्रित और विषय-प्रधान कहानियों का रास्ता चुना।

उनके करियर का अहम मोड़ ‘आकाश वाणी’ साबित हुई, जहां उन्होंने भावनात्मक शोषण और वैवाहिक बलात्कार जैसे संवेदनशील विषयों को पर्दे पर निभाया, वह भी ऐसे समय में, जब हिंदी सिनेमा में इन मुद्दों पर खुलकर बात नहीं होती थी। भले ही उस वक्त फिल्म और उनके प्रदर्शन को उतनी सराहना नहीं मिली, लेकिन इस किरदार ने यह संकेत जरूर दे दिया कि नुसरत पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ना चाहती हैं।

इसके बाद आया उनके करियर का गेम-चेंजर दौर। ‘छोरी’ के साथ नुसरत ने हॉरर-सर्वाइवल ड्रामा की दुनिया में कदम रखा और लगभग अकेले दम पर फिल्म को संभाला। एक गर्भवती महिला के रूप में, जो अलौकिक डर और सामाजिक बुराइयों दोनों से लड़ती है, नुसरत ने साबित किया कि वे बिना किसी बड़े मेल लीड के भी स्क्रीन पर पूरी पकड़ बना सकती हैं। ‘छोरी’ के बाद ‘छोरी 2’ के साथ वे और भी ज्यादा दमदार अंदाज़ में लौटीं और खुद को इस फ्रेंचाइज़ी का चेहरा बना लिया।

फिल्म ‘जनहित में जारी’ में जहां उन्होंने एक जागरूक महिला का किरदार निभाया, वहीं, फिल्म ‘अकेली’ में उनका अभिनय और भी स्पष्ट रूप से सामने आया। युद्धग्रस्त इलाके में फंसी एक भारतीय महिला के किरदार में नुसरत ने पूरी फिल्म का भावनात्मक भार अपने कंधों पर उठाया। इस भूमिका में उन्होंने संवेदनशीलता, साहस और जुझारूपन को बेहद प्रभावशाली तरीके से पेश किया।

मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्मों से लेकर ‘छोरी’ और ‘अकेली’ जैसी फिल्मों की मुख्य ताकत बनने तक, नुसरत भरुचा का करियर इस बात का प्रमाण है कि खुद को लगातार नए रूप में ढालना कितना जरूरी है।

नुसरत सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। वह अक्सर अपने प्रशंसकों के साथ अपनी फिल्मों, फिटनेस और निजी जीवन से जुड़ी बातें साझा करती रहती हैं।

 

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