सन-एक्सपोजर से Vitamin D की कमी पूरी होती है, लेकिन यदि हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की कमी होती है, तो Vitamin D हमारे शरीर में एब्जॉर्ब नहीं हो पाता है।
भारतीयों में कई विटामिन की कमी पाई जाती है। इसका कारण है हमारा खान-पान और लाइफस्टाइल। हम बात कर रहे हैं विटामिन डी की। विटामिन डी की कमी आमतौर पर गर्भवती महिलाएं, बुजुर्गों व बच्चों में ज्यादातर पाई जाती है। विटामिन डी की कमी से जोड़ों में दर्द, हड्डियों का कमजोर होना, थकान और बार-बार बीमार पड़ सकते हैं।
किस उपाय से मिलेगा भरपूर विटामिन डी
विटामिन डी को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है, क्योंकि यह आसानी से सुबह की धूप में 10-30 मिनट तक बैठने से मिल जाता है। धूप सीधे हमारे स्कीन पर पड़नी चाहिए। साथ ही, धूप भी हमारे शरीर में इस विटामिन की कमी को तभी पूरी कर सकती है, जब हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल हो। कोलेस्ट्रॉल नॉन वेज फूड और डेयरी प्रोडक्ट (Dairy Product) जैसे- दूध, दही, पनीर, चीज आदि से मिलता है। इसके अलावा अंडे, फैटी फिश, मशरूम व घी से भी इसकी कमी पूरी की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वीगन फूड में कोलेस्ट्रॉल का कोई विकल्प नहीं होता है।
धूप हमारे शरीर में 80-90 फीसदी तक विटामिन डी की कमी को पूरा कर देती है। इसके अलावा 10-20 प्रतिशत की कमी खानपान का ध्यान रखकर पूरी की जा सकती है। गहरे रंग या सांवले रंग की त्वचा वाले लोगों को थोड़ी ज्यादा देर (35-40 मिनट) तक धूप में रहने की आवश्यकता होती है।
सप्लीमेंट्स से भी होगा फायदा
हांलाकि विटामिन डी की कमी को कुछ Supplements के जरिए भी पूरा किया जा सकता है, लेकिन वो डॉक्टरी परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए। हमारे शारीरिक सिस्टम के लिए विटामिन डी को नेचुरली तरीके से बढ़ाना ही सही और सस्टेनेबल तरीका है।
सप्लीमेंट्स के कई साइड इफेक्ट्स, जैसे हाइपरकैलसेमिया का खतरा बढ़ सकता है। इसमें कैल्शियम का एब्जॉर्बशन बढ़ जाता है और साथ ही चिड़चिड़ापन, भ्रम, हार्ट संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, पाचन संबंधी समस्या, किडनी डैमेज, कमजोरी, स्कीन संबंधी समस्याएं व वेटलॉस जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
