यूपी की सियासत में ब्राह्मण विधायकों की बैठक से मचा हड़कंप, भाजपा में उपेक्षा के आरोपों के बीच सपा ने दिया साथ आने का खुला ऑफर

नई दिल्ली। 25 दिसंबर, 2025। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के बीच लखनऊ में भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस बैठक में भाजपा के लगभग 40 विधायक और विधान परिषद सदस्य (MLC) शामिल हुए, जिनमें अधिकांश पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के हैं। हालांकि, आयोजकों ने इसे एक सामान्य ‘स्नेह भोज’ करार दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार और संगठन के भीतर ब्राह्मणों की कथित उपेक्षा के खिलाफ एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हाल के दिनों में क्षत्रिय और कुर्मी समाज की बैठकों के बाद इस आयोजन ने भाजपा नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

इस बैठक के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने भाजपा की आंतरिक कलह पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी ही पार्टी के भीतर चल रहे इस असंतोष पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने नाराज ब्राह्मण विधायकों को बड़ा ऑफर देते हुए कहा कि भाजपा में अपमानित महसूस कर रहे विधायक यदि सपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा। विपक्ष के इस रुख ने भाजपा के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे जातिगत समीकरणों के बिगड़ने का डर सता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के भीतर यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि भाजपा की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाने के बावजूद ब्राह्मण समाज को सरकार और संगठन में वह स्थान नहीं मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं। विधायकों ने समाज के खिलाफ हो रही बयानबाजी और दूसरी जातियों को मिल रही अधिक तवज्जो पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। बैठक में शलभ मणि त्रिपाठी, रत्नाकर मिश्रा और साकेत मिश्रा जैसे प्रमुख नाम मौजूद रहे। यद्यपि विधायक पंचानंद पाठक ने सफाई दी कि यह केवल एक औपचारिक मेल-मिलाप था, लेकिन सत्र के दौरान हुई इस बैठक की टाइमिंग ने प्रदेश की सत्ता में बड़े बदलाव के कयासों को जन्म दे दिया है।

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