सोनी सब कलाकारों ने वर्ल्ड अर्थ डे पर स्थिरता और जिम्मेदारी का संकल्प लिया

मुंबई, 18 अप्रैल (वार्ता) सोनी सब कलाकारों ने वर्ल्ड अर्थ डे पर स्थिरता और जिम्मेदारी का संकल्प लिया है। शो यादें में डॉ. देव का किरदार निभा रहे इक़बाल खान ने कहा, “विश्व पृथ्वी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जिस ग्रह को हम अपना घर कहते हैं, वह हमारी संपत्ति नहीं है, बल्कि हमें सौंपा गया एक भरोसा है। प्रकृति हमें ज़मीन से जोड़ने का तरीका जानती है, लेकिन तेज़ रफ्तार वाली दिनचर्या में हम अक्सर इसकी अहमियत भूल जाते हैं। मेरा मानना है कि छोटी-छोटी आदतें, जैसे पानी बचाना या कचरा कम करना, यदि लगातार अपनाई जाएँ, तो बड़ा फर्क ला सकती हैं। हम अक्सर व्यक्तिगत स्तर पर सामूहिक प्रयास की ताकत को कम आँकते हैं, लेकिन यदि हम सब अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ, तो उसका असर वाकई बदल देने वाला हो सकता है।”

यादें में सृष्टि का किरदार निभा रही गुलकी जोशी ने कहा, “मेरे लिए विश्व पृथ्वी दिवस बेहद व्यक्तिगत है, क्योंकि मैं मानती हूँ कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता ही यह तय करता है कि हम किस तरह का भविष्य बना रहे हैं। हम अक्सर बड़े-बड़े समाधान तलाशते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बदलाव घर से शुरू होता है, हम कैसे चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं, कैसे उन्हें फेंकते हैं और यहाँ तक कि कैसे सोचते हैं। मैं कोशिश करती हूँ कि जहाँ भी संभव हो, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प चुनूँ। धरती हमें बिना किसी उम्मीद के इतना कुछ देती है, तो कम से कम हमें ईमानदारी और आभार के साथ इसका ख्याल रखना चाहिए।”

पुष्पा इम्पॉसिबल में शनाया का किरदार निभा रही मुस्कान बामने ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी पीढ़ी के पास बेहतर भविष्य बनाने का अवसर भी है और ज़िम्मेदारी भी। विश्व पृथ्वी दिवस सिर्फ प्रकृति का उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमारी आदतों पर सोचने और समझने का मौका भी है कि वे धरती को कैसे प्रभावित करती हैं। मैंने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटे-छोटे बदलाव शुरू किए हैं, जैसे सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचना और कचरे को लेकर अधिक सजग रहना। इससे मुझे एहसास हुआ कि टिकाऊ जीवनशैली अपनाना वास्तव में बहुत आसान है। यदि हममें से हर कोई एक कदम आगे बढ़े, तो यह बदलाव वाकई मायने रखने वाला हो सकता है।”

पुष्पा इम्पॉसिबल में पुष्पा का किरदार निभा रही करुणा पांडे ने कहा, “मेरा मानना है कि पर्यावरण की देखभाल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सजग रहने से शुरू होती है। आपको सब कुछ एक साथ करने की ज़रूरत नहीं है, बस छोटे-छोटे, सोच-समझकर उठाए गए कदमों से शुरुआत करें। अपना बैग साथ रखना, बिजली बचाना या कोई पौधा लगाना, ये सब प्रकृति से जुड़ाव बनाने के तरीके हैं। जब यह जुड़ाव महसूस होता है, तो हमारा नज़रिया अपने आप बदल जाता है। विश्व पृथ्वी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि निरंतरता, पूर्णता से कहीं अधिक मायने रखती है। हर प्रयास, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, वास्तव में अहम् होता है।”

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