अब जीआरपी सिर्फ पुलिस नहीं, यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी है

इंदौर: रेलवे परिसरों में अपराध रोकना ही अब जीआरपी का लक्ष्य नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भरोसेमंद वातावरण देना हमारी प्राथमिकता है. यह कहना है शासकीय रेल पुलिस इंदौर के पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल का, जिन्होंने नव भारत प्रतिनिधि से विशेष बातचीत में वर्ष 2025 की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की.
एसपी शुक्ल के अनुसार जीआरपी ने वर्ष 2025 में यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी मोबाइल चोरी पर विशेष फोकस किया.

हमारी टीम ने 609 मामलों में 609 मोबाइल बरामद कर एक करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति यात्रियों को लौटाई. यह सिर्फ रिकवरी नहीं, अपराधियों के मन में डर पैदा करने की रणनीति थी, उन्होंने कहा कि लूट के चार मामलों में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी कर 44 हजार से अधिक का मशरूका जब्त किया, जबकि संपत्ति अपराधों में 96 लाख रुपए से ज्यादा की बरामदगी की गई.

नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई
एसपी ने बताया कि अवैध शराब और मादक पदार्थों पर जीआरपी ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई. आबकारी एक्ट के तहत 46 मामलों में करीब एक हजार लीटर अंग्रेजी शराब और 19 लीटर देशी शराब जब्त की गई. वहीं उज्जैन, रतलाम और शामगढ़ क्षेत्रों में गांजा और डोडाचूरा की बड़ी खेप पकड़ी गई. उन्होंने कहा, नशा सिर्फ अपराध नहीं, समाज को खोखला करने वाला जहर है. रेलवे को इसकी तस्करी का रास्ता नहीं बनने देंगे.

173 बच्चों को परिवार से मिलवाया
मानवीय पहल पर जोर देते हुए एसपी शुक्ल ने बताया कि वर्षभर में 173 असंरक्षित बच्चों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया, जिनमें 40 बच्चे अपहरण के मामलों से जुड़े थे. कई बार बच्चे भूखे-प्यासे स्टेशन पर मिलते हैं, हमारे जवान पहले उन्हें इंसान समझकर संभालते हैं, फिर पुलिसिया प्रक्रिया होती है, उन्होंने कहा.

महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों से सीधा संवाद
शुक्ल के अनुसार, जीआरपी इंदौर ने 12,988 अकेली महिला यात्रियों, 8,860 वरिष्ठ नागरिकों और 3,476 दिव्यांगजनों से संपर्क कर सुरक्षा और सहायता दी. एसपी शुक्ल के मुताबिक, जब पुलिस खुद आगे बढ़कर बात करती है, तभी भरोसा बनता है.

गुमशुदा और घायल यात्रियों के लिए देवदूत बनी जीआरपी
वर्ष 2025 में 74 गुमशुदा लोगों को खोजा गया और 17 लाख रुपए से अधिक की खोई संपत्ति लौटाई गई. वहीं 96 घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर कई जिंदगियां बचाई गईं.

‘पटरी की पाठशाला’ से बदली सोच
रेल पटरी के आसपास रहने वाले बच्चों और नागरिकों को सुरक्षा, नशा मुक्ति और साइबर अपराध से बचाव की शिक्षा दी गई. इसमें जनप्रतिनिधियों से लेकर सामाजिक संगठनों तक की भागीदारी रही.

क्यू आर कोड से बदली स्टेशन की सवारी व्यवस्था
एसपी शुक्ल ने गर्व से बताया कि ‘हमारी सवारी-भरोसे वाली’ अभियान के तहत 261 ऑटो और टैक्सी क्यूआर कोड से सत्यापित की गईं. एक स्कैन में चालक की पूरी जानकारी यात्रियों के सामने होती है. अब तक 790 फीडबैक मिल चुके हैं, जो इस सिस्टम की सफलता बताते हैं.

भविष्य की तैयारी भी मजबूत
अंत में एसपी पद्मविलोचन शुक्ल ने कहा, हमारा लक्ष्य है कि जीआरपी सिर्फ अपराध पर कार्रवाई न करे, बल्कि यात्रियों के लिए भरोसे की ढाल बने. तकनीक, संवेदना और सख्ती तीनों के संतुलन से रेलवे को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा. एसपी शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश जीआरपी के विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता और उप पुलिस महानिरीक्षक पंकज श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में जीआरपी इंदौर ने परंपरागत पुलिसिंग से आगे बढ़कर संवेदनशील और तकनीक आधारित कार्यप्रणाली अपनाई है. उप पुलिस अधीक्षक ज्योति शर्मा के समन्वय से हर स्तर पर निगरानी और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की गई.

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