नई दिल्ली | 10 जनवरी, 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उनके हस्तक्षेप की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध टल गया। ट्रंप के अनुसार, मई 2025 में जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर था और हवाई हमले हो रहे थे, तब उनके ‘रैपिड ऑर्डर’ ने एक बड़ी त्रासदी को रोका। ट्रंप ने खुद को शांति का दूत बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि वे बीच में न आते, तो दक्षिण एशिया में करोड़ों लोग अपनी जान गंवा सकते थे।
अपने दावों को पुख्ता करने के लिए ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयानों का हवाला दिया, जिसमें शरीफ ने अमेरिकी मध्यस्थता की सराहना की थी। हालांकि, भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का स्पष्ट कहना है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान को जवाब दिया गया था और युद्धविराम का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था। भारत ने हमेशा की तरह किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को पूरी तरह नकार दिया है।
भारत-पाक विवाद के अलावा ट्रंप ने ईरान सरकार को भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि वहां प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान खुद को दुनिया के सबसे शक्तिशाली और सफल मध्यस्थ के रूप में पेश करने की एक सोची-समझी रणनीति है। वे लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत दुनिया पहले से कहीं अधिक सुरक्षित है। अब देखना यह है कि ट्रंप की यह ‘नोबेल’ की चाहत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में क्या नया मोड़ लाती है।

