
जबलपुर। हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि फोटो खींचने के आरोप धारा 509 के तहत अपराध दर्ज करने आवश्यक तथ्य में नहीं आता है। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी ने आवेदक अधिवक्ता के खिलाफ धारा 509 के तहत दर्ज अपराध को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
अधिवक्ता सुभाष तिवारी ने थाना सोहागी जिला रीवा में उसके खिलाफ धारा 509 के तहत दर्ज अपराध को निरस्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वह अपने दोस्तो के साथ मार्केट में जूस पी रही थी। इस दौरान आवेदक अधिवक्ता ने उसकी फोटो खीच ली और और उसे बदनाम करने की धमकी दी। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि फोटो खींचने की घटना 31 मई 2024 की बताई गई है और एफआईआर पांच महीने बाद 17 अक्टूबर को दर्ज कराई गई है। इसके अलावा शिकायतकर्ता महिला के दादा के प्रकरण में विपक्षी पक्ष के तरफ से याचिकाकर्ता पैरवी कर रहे है। आवेदक के विरुद्ध पेशेगत शत्रुता एवं व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण एफआईआर दर्ज करवाई गयी है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह अपने दोस्तों के साथ जूस पी रही थी और आवेदक ने उसकी फोटो खींच ली और बाद में अभियोजन के प्रकरण में धारा 509 के ज़रूरी तत्व नहीं हैं। धारा 509 के तहत किसी महिला की इज्ज़त को ठेस पहुँचाने के इरादे से, कोई शब्द बोले जाये, कोई आवाज़ या इशारा करता है, या कोई चीज़ दिखाता है। जिसका इरादा वह शब्द या आवाज़ उस महिला को सुनाई दे, या इशारा या चीज़ दिखाई दे, जिससे उसकी प्राइवेसी में दखल हो। ऐसे अपराध में तीन साल तक की जेल और जुर्माना का प्रावधान है। शिकायतकर्ता के धारा 164 के तहत दर्ज बयानों को सिर्फ़ देखने से यह नहीं लगता कि फ़ोटो खींचने का काम आवेदक का है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाकर्ता अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज प्रकरण को निरस्त करने के आदेश दिये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता निखिल भट्ट ने पैरवी की।
