ब्रुसेल्स, 27 जनवरी (वार्ता) आर्थिक और जनसांखियकीय कारणों के साथ-साथ डेनमार्क के साथ अपने करीबी संबंधों के कारण आने वाले समय में ग्रीनलैंड की आजादी का मुद्दा जटिल बना हुआ है और इसके लिए बाहरी हितों की बजाय खुद ग्रीनलैंड के लोगों के भविष्य पर विचार करने की जरूरत है। ग्रीनलैंड की संसद के उपाध्यक्ष बेंटियाराक ओटोसेन ने संवाद समिति रिया नोवोस्ती को यह जानकारी दी है
उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड की आजादी एक वास्तविकता नहीं है। शायद आजादी मिलने में पांच या दस साल लग जाए।” ओटोसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड को डेनमार्क की सीमाओं के भीतर ही रहना होगा क्योंकि दोनों पक्ष लगभग एकजुट हैं। द्वीप की आबादी लगभग 56,000 है जबकि डेनमार्क की आबादी 50 लाख है, जिससे ग्रीनलैंड ‘एक बड़े देश में बहुत छोटा’ है।
उपाध्यक्ष ने कहा कि आजादी का मुद्दा जटिल बना हुआ है और इसके लिए बाहरी हितों की बजाय खुद ग्रीनलैंड के लोगों के भविष्य पर विचार करने की जरूरत है। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि बार-बार कहा है कि इस द्वीप को अमेरिका का हिस्सा बनना चाहिए। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने अमेरिका को इस द्वीप पर कब्जा करने के खिलाफ यह कहते हुए चेतावनी दी है कि वे अपनी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की उम्मीद करते हैं।

