लॉस एंजिल्स | लॉस एंजिल्स में आयोजित संगीत के सबसे प्रतिष्ठित ’68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स’ में इस साल भारतीय कलाकारों ने अपनी कला का लोहा तो मनवाया, लेकिन अंतिम सूची में जगह बनाने से चूक गए। भारत की ओर से सबसे बड़ी उम्मीद सितार वादक अनुष्का शंकर से थी, जिन्होंने 13वीं बार ग्रैमी नामांकन हासिल कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। अनुष्का को ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ सहित दो श्रेणियों में नामांकित किया गया था। वहीं, पिछले साल के विजेता फ्यूजन बैंड ‘शक्ति’ का एल्बम ‘माइंड एक्सप्लोसन’ भी दौड़ में था, पर कड़े वैश्विक मुकाबले के कारण इस बार भारत की झोली खाली रही।
भले ही दिग्गज कलाकार पुरस्कार नहीं जीत सके, लेकिन इस साल कुछ नए भारतीय चेहरों ने ग्रैमी की दहलीज पर कदम रखकर भविष्य के लिए उम्मीदें जगा दी हैं। इंडो-अमेरिकी जैज पियानिस्ट चारू सूरी को उनके एल्बम ‘श्यान’ के लिए पहली बार नामांकित किया गया। उनके साथ ही सिद्धांत भाटिया ने अपने एल्बम ‘साउंड ऑफ महाकुंभ’ के जरिए ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी में पहली बार दावेदारी पेश की। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार नामांकित होना ही इन उभरते कलाकारों के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
ग्रैमी 2026 के परिणाम भले ही भारतीय प्रशंसकों के लिए थोड़े निराशाजनक रहे हों, लेकिन शास्त्रीय से लेकर जैज और फ्यूजन तक भारतीय धुनों की गूंज ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संगीत की ताकत वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। पंडित रवि शंकर और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसी महान शख्सियतों के गौरवशाली इतिहास को अब नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। संगीत विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय संगीत अब पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर वैश्विक पॉप और जैज संस्कृति के साथ बखूबी घुलमिल रहा है, जो आने वाले समय में और भी सुनहरे अवसर लेकर आएगा।

