रविवार को विश्व उम्मीद दिवस मनाया गया, इस बार यह दिवस ऐसे समय आया है, जब भारत की विकास यात्रा को लेकर दुनिया की नजरें पहले से कहीं अधिक गंभीरता से टिकी हुई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान वहां के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सर का यह कहना कि ‘आज का भारत उम्मीदों और अवसरों से भरा देश है ‘, केवल एक औपचारिक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक दृष्टिकोण का संकेत है. यह स्वीकारोक्ति बताती है कि भारत अब केवल एक विशाल बाजार नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक, सामरिक और तकनीकी शक्ति के रूप में देखा जा रहा है.
पिछले एक दशक में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर निकलना सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण कहानी कहता है. तेजी से विस्तार करता मध्यम वर्ग देश की बढ़ती क्रय शक्ति, उपभोग क्षमता और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक है. यही वर्ग आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ वैश्विक निवेशकों के लिए भी सबसे बड़ा आकर्षण बनेगा.
भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, युद्धों और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है. डिजिटल भुगतान, आधार, यूपीआई, स्टार्टअप इकोसिस्टम और विनिर्माण क्षेत्र में हुए सुधारों ने भारत को नई पहचान दी है. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों का प्रभाव अब रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, मोबाइल निर्माण और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देने लगा है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत लगातार अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है. हाल में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना को अमेरिका और रूस के बाद दुनिया की तीसरी सबसे प्रभावशाली वायुसेना माना जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे स्पष्ट होता है कि भारत केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आधुनिक तकनीक पर बढ़ता जोर भविष्य के लिए और अधिक आत्मविश्वास पैदा करता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्राएं भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं. व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने से जुड़े समझौते भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं को मजबूती देंगे. आज वैश्विक कंपनियां भारत को केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और निवेश के भरोसेमंद साझेदार के रूप में भी देखने लगी हैं.
फिर भी यह नहीं भूलना चाहिए कि अवसरों के साथ चुनौतियां भी मौजूद हैं. रोजगार सृजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, कृषि सुधार, कौशल विकास और आय में असमानता जैसे मुद्दों पर निरंतर काम करना होगा. यदि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, तभी उम्मीदों का यह भारत वास्तव में विकसित भारत का स्वरूप ग्रहण कर सकेगा.
आज भारत के पास युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता, लोकतांत्रिक स्थिरता और वैश्विक विश्वास. ये चारों उसकी सबसे बड़ी पूंजी हैं. आवश्यकता केवल इस बात की है कि सुधारों की गति बनी रहे, नवाचार को प्रोत्साहन मिले और समावेशी विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. यदि ऐसा हुआ तो उम्मीदों और अवसरों से भरा आज का भारत, आने वाले वर्षों में विश्व व्यवस्था का एक निर्णायक नेतृत्वकर्ता बनकर उभरेगा.
