
महंगाई और डीए में वृद्धि के बावजूद नए वेतन आयोग पर सरकार की चुप्पी; कर्मचारियों को अगले वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार, पुरानी पेंशन योजना की मांग भी तेज।
नई दिल्ली, 4 जुलाई (नवभारत): केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने में हो रही देरी को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है। एक ओर जहाँ महंगाई और महंगाई भत्ते (DA) में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से अगले वेतन आयोग के गठन या उसके लागू होने की समय-सीमा पर कोई स्पष्टता नहीं है, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंताएं बढ़ रही हैं।
आमतौर पर, वेतन आयोग हर 10 साल में एक बार गठित किया जाता है, ताकि केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन की सिफारिशें की जा सकें। सातवां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, जिसके अनुसार आठवां वेतन आयोग 2026 में लागू होना चाहिए। हालांकि, अभी तक न तो आठवें वेतन आयोग के गठन की कोई आधिकारिक घोषणा हुई है और न ही इसकी रिपोर्ट पर कोई प्रगति दिख रही है। कर्मचारियों संगठनों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे में उनके वेतन में उचित वृद्धि बेहद जरूरी है। इसके अलावा, कई पेंशनर्स भी अपनी पेंशन में वृद्धि और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर रहे हैं, जो उन्हें बढ़ती उम्र में वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर सके।
सरकार की संभावित रणनीति: क्या ‘फिटमेंट फैक्टर’ से होगा समाधान या आएगा नया आयोग?
इस देरी के पीछे कई अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार आठवां वेतन आयोग गठित करने के बजाय मौजूदा ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) के आधार पर ही वेतन वृद्धि कर सकती है।
यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों के मूल वेतन में एक निश्चित प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है, जैसा कि सातवें वेतन आयोग में भी किया गया था। वहीं, कुछ अन्य लोगों का मानना है कि सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए वेतन आयोग के गठन में देरी कर रही है। हालांकि, कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर निराशा बढ़ रही है कि उनके वेतन और भत्ते महंगाई के अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं। अब सभी की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह कब तक इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करती है और कर्मचारियों व पेंशनर्स को राहत देती है।
