नयी दिल्ली, 25 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि विभिन्न् क्षेत्रों में अग्रणी रही भारत की महान विरासत में इधर सबसे महत्वपूर्ण काम यह हो रहा है कि देश ने गुलामी की मानसिकता के अवशेषों से मुक्त होने का समयबद्ध संकल्प लिया है।
श्रीमती मुर्मु ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह सबसे गौरव की बात है कि आज का भारत, नये आत्म-विश्वास के साथ, अपनी गौरवशाली परम्पराओं के प्रति सचेत होकर आगे बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में हमारी आध्यात्मिक परंपरा के पवित्र स्थलों को जन-चेतना के साथ जोड़ा गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इधर महत्त्वपूर्ण काम यह हो रहा है कि देश ने नियत अवधि में गुलामी की मानसिकता के अवशेषों से मुक्त होने का समयबद्ध संकल्प लिया है। सरकार और जनता के बीच की दूरी को कम किया जा रहा है। आपसी विश्वास पर आधारित सुशासन पर बल देते हुए अनेक अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है और कई अनुपालनों के पालन को खत्म कर आम जनता के हित में सभी जटिल व्यवस्थाओं को सरल बनाते हुए टेक्नॉलॉजी के माध्यम से लाभार्थियों को सुविधाओं से सीधे जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, गणित, साहित्य तथा कला की महान विरासत उपलब्ध है। गर्व की बात यह है कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ जैसे प्रयासों से भारतीय परंपरा में उपलब्ध रचनात्मकता को संरक्षित और प्रसारित किया जा रहा है। मिशन भारत की लाखों अमूल्य पाण्डुलिपियों में संचित विरासत को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाएगा। भारतीय भाषाओं तथा ज्ञान परम्परा को प्राथमिकता देकर आत्म-निर्भरता के प्रयासों को सांस्कृतिक आधार प्रदान किया जा है।
उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ जीवन को आसान बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले दशक के दौरान राष्ट्रीय लक्ष्यों को जनभागीदारी के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया गया है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। गांव-गांव में, नगर-नगर में स्थानीय संस्थाओं को प्रगतिशील बदलाव का माध्यम बनाया गया है।
