दूषित पानी से हैं शर्मसार

मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी ने 20 लोगों की जान ले ली और 50 लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं और इनमें से 10 गंभीर मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है। 8 जनवरी को 23 और नए मरीज आए और इनमें 6 की हालत गंभीर है। आजादी के 70 साल बाद भी क्या हम स्वच्छ जल के लिए जूझते रहेंगे, यह सभी राज्य सरकारों के लिए गहन चिंता का विषय जरूर होना चाहिए।

इंदौर घटना की पुनरावृत्ति मध्यप्रदेश के दूसरे जिलों में न हो यह सुनिश्चित करना सरकार का काम है क्योंकि राजधानी भोपाल समेत सभी जिलों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है। पूरे प्रदेश से दूषित पानी की रिपोर्ट आ रही है। राजधानी भोपाल की 737 कॉलोनियों के लोग आज भी बोरवेल के पानी पीने को मजबूर हैं और कई कॉलोनियों में पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है और हमारे सिस्टम के लिए शर्मनाक है। सरकार सिस्टम से चलती है और अगर सिस्टम को हम ठीक से चलाने का प्रयत्न ही नहीं करेंगे तो सवाल उठेगा और जाहिर है.

विपक्षी दल कांग्रेस के नेता इसे मुद्दा बनाकर लोगों तक ले जाएंगे क्योंकि उन्हें भी अपनी राजनीति करनी है। प्रदेश की सरकार को चाहिए कि सिस्टमैटिक तरीके का पालन कर हर विभाग के कामकाज की मॉनिटरिंग के लिए एक कमेटी गठित करे और उसमें स्वच्छ और दूरदर्शी छवि वाले व्यक्तियों को उसका सदस्य और अध्यक्ष बनाए। सूत्र बताते हैं कि सरकार को बदनाम करने की मंशा से दूषित पानी मामले में गहरा षडयंत्र हुआ है।

इसलिए सरकार को पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने का आदेश देना चाहिए क्योंकि सरकार की छवि धूमिल हुई है। इस घटना के बाद विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी 11 जनवरी को इंदौर आ रहे हैं और इस मसले पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की उनकी पूरी तैयारी है। ऐसे राजनीतिक हालात में सरकार के पास एक ही विकल्प है कि वह सीबीआई जांच के आदेश से यह सुनिश्चित करे कि दोषियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी रुक नहीं रही
इन दिनों पूरे प्रदेश में एक बार फिर से डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी के मामले ने लोगों की नींद हराम कर दी। ये साइबर ठग भोलेभाले किसान समेत पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर और वकील जैसे गजटेट रैंक के अधिकारियों को निशाना बनाकर मिनटों में उनके खातों से लाखों उड़ा देते हैं और पुलिस उनका कुछ नहीं पाती है। यह हैरानी की बात है कि ऐसी घटना अन्य प्रदेशों में बहुत कम है लेकिन मध्यप्रदेश में बहुत तेज रफ्तार में हो रही है। साइबर पुलिस क्या कर रही है। हर जिले में साइबर पुलिस का अमला है तो उनकी ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

उनकी तिमाही समीक्षा बैठक डीजीपी को लेनी चाहिए। क्योंकि पूरे प्रदेश में कई गिरोह सक्रिय हैं जो लोगों की जीवन भर की कमाई को मिनटों में उड़ा देते हैं। पता नहीं पुलिस की क्या मजबूरी है वह इस प्रकार की ठगी रोक नहीं पा रही है। पुलिस अथवा सुरक्षा एजेंसियों को यह देखना चाहिए कि कहीं ये पैसे आतंकियों के हाथों में तो नहीं जा रहा है।‌ पिछले सप्ताह बैतूल में 23 लाख की धोखाधड़ी और इस सप्ताह में इंदौर की एक बुजुर्ग महिला से 17 लाख की ठगी की छोटा अपराध नहीं कह सकते हैं। मध्यप्रदेश साइबर पुलिस को ठगी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजनाएं तैयार करनी चाहिए।अगर उसके पास कर्मचारियों की कमी है तो प्रस्ताव बनाकर सरकार को देना चाहिए।

Next Post

संपत्तिकर वसूलने कुर्की करने पहुंची टीम, मौके पर किया राशि का भुगतान

Sat Jan 10 , 2026
रीवा: निगम आयुक्त के निर्देशानुसार नगर निगम रीवा की राजस्व टीम ने संपत्तिकर के बड़े बकायादारों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए अंतिम सूचना के बाद भी भुगतान न करने पर चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा. इसी क्रम में बड़े बकायादारों के विरुद्ध […]

You May Like