
इंदौर.वन विभाग की बाघ गणना प्रक्रिया में महू, चोरल, मानपुर, रालामंडल सहित इंदौर की सभी रेंजों में अब तक तेंदुए के 195 और बाघ के 51 पदचिन्ह मिले हैं. इनमें से सबसे ज्यादा निशान चोरल फॉरेस्ट रेंज में दर्ज हुए हैं. गणना के बाद नए साल 2026 में फोटो और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर वास्तविक संख्या सामने आएगी.
डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इसे गणना कहना व्यवहारिक तौर पर ठीक नहीं है, क्योंकि पदचिन्ह केवल मौजूदगी के प्रमाण हैं. सही संख्या के लिए कैमरों में कैद तस्वीरों का मिलान, डीएनए, विष्ठा, फोटो मार्किंग और अन्य जैविक परीक्षण जनवरी 2026 में शुरू होंगे. इसके बाद महीनों की जांच के बाद ही तेंदुए और बाघों की असल संख्या सामने आएगी. राष्ट्रीय स्तर पर चल रही इस बाघ गणना अभियान में इंदौर वन विभाग की महू, चोरल, मानपुर, रालामंडल व इंदौर फॉरेस्ट रेंज शामिल हैं. विभाग की टीमों द्वारा पदचिन्ह दर्ज करने का काम जारी है. अब तक इंदौर जिले के जंगलों में तेंदुए के 195 और बाघ के 51 पदचिन्ह दर्ज किए जा चुके हैं. इससे यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि 51 बाघ हो गए, हो सकता हैं कि यह एक ही बाघ के निशान हो, जो पूरे क्षेत्र में घूम रहा हो. डीएफओ का कहना है कि आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के जंगलों में बाघ और तेंदुओं की उपस्थिति मजबूत है, वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि इनकी आबादी में वृद्धि हुई है या नहीं.
बाघ के 51 पदचिन्ह…
चोरल रेंज में तेंदुए के 89 और बाघ के 37 पदचिन्ह, इंदौर रेंज में 40 तेंदुए व 5 बाघ के पदचिन्ह, महू में 32 तेंदुए और 7 बाघ के निशान मिले. मानपुर क्षेत्र में 32 तेंदुओं और 2 बाघों के चिन्ह दर्ज हुए. रालामंडल में तेंदुए के 2 पदचिन्ह, जबकि बाघ का कोई निशान नहीं मिला. इंदौर वन विभाग में सबसे अधिक 126 निशान चोरल फॉरेस्ट रेंज में दर्ज किए गए हैं. इसके बाद इंदौर रेंज दूसरे स्थान पर है, जबकि महू और मानपुर क्षेत्र में भी वन्यजीवों की अच्छी मौजूदगी सामने आई है.
